
मऊगंज । मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh)के मऊगंज जिले(Mauganj district) के मलकपुर इलाके (Malakpur area)में बिजली के तार की चपेट में आने से एक मखना हाथी की दर्दनाक मौत(painful death of makhana elephant) हो गई। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि दो नर हाथियों की मौजूदगी पिछले कई महीनों से रीवा सीधी और मऊगंज क्षेत्र में बनी हुई थी। वन विभाग की टीम लगातार इनकी निगरानी कर रही थी। इसी दौरान मलकपुर गांव के पास एक हाथी बिजली के तार की चपेट में आ गया और उसकी जान चली गई। घटना के बाद वन विभाग ने मृत हाथी का पोस्टमार्टम कराया और प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसका अंतिम संस्कार किया गया
स्थानीय लोगों के मुताबिक दोनों हाथी लंबे समय से क्षेत्र में घूम रहे थे। रात के समय उनके गांव के आसपास पहुंचने से ग्रामीणों में डर का माहौल बना रहता था। मलकपुर सरपंच सुरेंद्र गिरी ने दावा किया कि हाथियों की मौजूदगी को लेकर वन विभाग को लगातार सूचना दी जा रही थी। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों ने कई जगह फसलों को नुकसान पहुंचाया और कुछ ग्रामीणों के घर भी प्रभावित हुए। उनका आरोप है कि लगातार सूचना दिए जाने के बावजूद हाथियों को सुरक्षित तरीके से हटाने या रेस्क्यू करने के लिए पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई
बताया गया कि घटना के समय मखना हाथी गांव के पास मौजूद था। इसी दौरान उसने अपनी सूंड ऊपर उठाई और वह बिजली के तार के संपर्क में आ गई। करंट लगने के बाद हाथी गंभीर रूप से झुलस गया और उसकी मौत हो गई। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक गांव के आसपास बिजली के खंभे और तार हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्र के काफी नजदीक थे। यही स्थिति हादसे की वजह बनी
वन विभाग के डीएफओ लोकेश निरापुरे के मुताबिक फरवरी से ही दोनों हाथियों की गतिविधियों को ट्रैक किया जा रहा था। इनमें से एक हाथी के गले में कॉलर आईडी लगी हुई थी जबकि दूसरे हाथी के पास कॉलर आईडी नहीं थी। विभाग के अनुसार दोनों नर हाथी आमतौर पर साथ रहते थे लेकिन घटना वाले दिन दोनों की लोकेशन में करीब दो से तीन किलोमीटर का अंतर सामने आया था। अधिकारियों के अनुसार कॉलर आईडी नहीं होने की वजह से दूसरे हाथी को लगातार ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण था
मखना हाथी की मौत के बाद अब वन विभाग के सामने दूसरे हाथी को सुरक्षित रेस्क्यू करने की चुनौती है। सीधी के संजय टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम और रीवा मऊगंज वन अमले ने मौके पर पहुंचकर अभियान शुरू कर दिया है। कोशिश की जा रही है कि दूसरे हाथी को सुरक्षित तरीके से पकड़कर टाइगर रिजर्व क्षेत्र में छोड़ा जाए ताकि वह आबादी वाले इलाकों से दूर रह सके और किसी अन्य हादसे की आशंका को कम किया जा सके
इस घटना ने एक बार फिर वन्यजीवों के आवास और मानव बस्तियों के बीच बढ़ते टकराव को सामने ला दिया है। हाथियों की लगातार आवाजाही वाले इलाकों में बिजली के तार और अन्य मानव निर्मित ढांचे उनके लिए खतरा बन सकते हैं। फिलहाल वन विभाग की प्राथमिकता दूसरे हाथी को सुरक्षित रेस्क्यू करना है। साथ ही यह भी देखना होगा कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था और निगरानी को किस तरह सुरक्षित बनाया जा सकता है
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