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मप्र में 2.42 करोड़ वाहन… निगरानी के लिए आधा स्टाफ

September 24, 2026

  • अब परिवहन विभाग में कैडर रिव्यू से पद बढ़ाने की तैयारी

भोपाल। मध्यप्रदेश की सड़कों पर वाहनों की संख्या पिछले डेढ़ दशक में ढाई गुना तक बढ़ गई, लेकिन उनकी निगरानी, फिटनेस, परमिट, जांच और प्रवर्तन की जिम्मेदारी संभालने वाला परिवहन विभाग उसी अनुपात में मजबूत नहीं हो सका। विभाग में स्वीकृत 1696 पदों में से 874 पद खाली हैं, यानी आधे से ज्यादा पदों पर नियमित अमला मौजूद नहीं है। विभाग के पास फिलहाल करीब 2.42 करोड़ पंजीकृत वाहन हैं। वर्ष 2011 में इनकी संख्या करीब एक करोड़ थी। इस दौरान वाहन संख्या तो तेजी से बढ़ी, लेकिन विभाग के स्वीकृत पदों में उस अनुपात में विस्तार नहीं हुआ। अब विभाग कैडर रिव्यू के जरिए इस अंतर को कम करने की तैयारी कर रहा है। परिवहन आयुक्त उमेश जोगा के अनुसार प्रत्येक संवर्ग में पद बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसके बाद भर्ती का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।



  • परिवहन विभाग की मौजूदा पदस्थिति में सबसे चौंकाने वाली स्थिति क्षेत्रीय और अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों के पदों की है। इनके सभी 38 स्वीकृत पद रिक्त बताए गए हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय उप परिवहन आयुक्त के 10 पदों में एक खाली है। सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों के 64 में से 23 पद रिक्त हैं। यानी जिस स्तर पर परिवहन व्यवस्था की निगरानी, क्षेत्रीय प्रशासन और प्रवर्तन की जिम्मेदारी होती है, वहीं मानव संसाधन की कमी बनी हुई है।

    निरीक्षण और प्रवर्तन वाले पदों में भी भारी कमी
    परिवहन निरीक्षक के 70 स्वीकृत पदों में 65 खाली हैं। मोटरयान परिवहन निरीक्षक के 15 पदों में छह रिक्त हैं। परिवहन उप निरीक्षक के 102 पदों में 49 पद खाली हैं। सहायक परिवहन उप निरीक्षक के सभी 34 पद रिक्त हैं। प्रधान आरक्षक और प्रधान आरक्षक वाहन चालक के 120 पदों में 94 पद खाली हैं। आरक्षक के 342 पदों में 34 और आरक्षक चालक के 38 पदों में 30 पद रिक्त हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि स्टाफ की कमी केवल ऊपरी प्रशासनिक पदों तक सीमित नहीं है, बल्कि मैदानी जांच और प्रवर्तन से जुड़े संवर्गों में भी बड़ा गैप है।

    प्रतिनियुक्ति से काम चलाने की मजबूरी
    नियमित अमले की कमी के कारण परिवहन विभाग को दूसरे विभागों से प्रतिनियुक्ति पर अधिकारियों-कर्मचारियों को लेने पर निर्भर रहना पड़ा है। इसमें पुलिस विभाग से प्रतिनियुक्ति का भी इस्तेमाल होता रहा है। हालांकि, पूर्व में परिवहन विभाग में प्रतिनियुक्ति पर रहे आरक्षक सौरभ शर्मा से जुड़े भ्रष्टाचार मामले के बाद प्रतिनियुक्ति व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे थे। लोकायुक्त कार्रवाई के बाद सामने आई संपत्ति से जुड़े आरोपों ने इस व्यवस्था की निगरानी पर बहस को जन्म दिया था। यह मामला अब विभाग के लिए इस सवाल को भी महत्वपूर्ण बनाता है कि जब नियमित कैडर मजबूत नहीं होगा तो प्रतिनियुक्ति पर निर्भरता कितनी प्रभावी और जवाबदेह व्यवस्था साबित होगी।

    अब कैडर रिव्यू से बदल सकती है तस्वीर
    परिवहन विभाग का प्रस्तावित कैडर रिव्यू इस पूरी समस्या का अगला चरण है। विभाग प्रत्येक संवर्ग की जरूरत के आधार पर पद बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। प्रस्ताव शासन को भेजे जाने के बाद पद स्वीकृत होते हैं तो भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। इससे विभाग को लंबे समय से खाली पड़े पद भरने के साथ-साथ बढ़ते वाहन भार के अनुरूप नया मानव संसाधन ढांचा तैयार करने का मौका मिलेगा।

    असली चुनौती सिर्फ 874 पद भरना नहीं
    परिवहन विभाग में 874 पद खाली होना तत्काल समस्या है, लेकिन उससे बड़ी चुनौती यह है कि 2.42 करोड़ वाहनों के बढ़ते बोझ के हिसाब से विभाग का कैडर कितना होना चाहिए। यदि वाहन संख्या इसी गति से बढ़ती रही तो केवल मौजूदा रिक्तियां भरने से समस्या स्थायी रूप से हल नहीं होगी। विभाग को भविष्य के वाहन भार, डिजिटल सेवाओं और मैदानी प्रवर्तन-तीनों को ध्यान में रखकर कैडर तैयार करना होगा।

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