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यूपी समेत पांच चुनावी राज्यों में अक्टूबर में वोटर लिस्ट का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण करा सकता है चुनाव आयोग

September 25, 2026

नई दिल्ली ।चुनाव आयोग (Election Commission) अक्टूबर में अगले साल विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) वाले पांच राज्यों (States) की मतदाता सूचियों (Voter Lists) का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (Revision) यानी SSR कराने का आदेश दे सकता है। संभावित प्रक्रिया में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड,() पंजाब, गोवा और मणिपुर शामिल हैं। इसके लिए 1 जनवरी 2027 को अर्हता तिथि (Qualifying Date) माना जा सकता है। चुनाव से पहले मतदाता सूची को अद्यतन करने के उद्देश्य से यह प्रक्रिया कराई जा सकती है।

मौजूदा परिस्थितियों में पूरे देश में एक साथ विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कराने की संभावना कम बताई जा रही है। इसकी वजह कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहा विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का तीसरा चरण और जनगणना की प्रक्रिया है। ऐसे में अगले वर्ष चुनाव वाले राज्यों की मतदाता सूचियों को प्राथमिकता के आधार पर अपडेट किया जा सकता है।

विशेष गहन पुनरीक्षण और विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की प्रक्रिया अलग-अलग होती है। SIR के दौरान मतदाता सूची की व्यापक और गहन जांच की जाती है। इसमें मतदाताओं की पात्रता और सूची में दर्ज जानकारी का विस्तृत सत्यापन किया जाता है। इसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना और गलत या अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करना होता है।

वहीं SSR का मुख्य उद्देश्य मौजूदा मतदाता सूची को संशोधित और अद्यतन करना है। इसके तहत नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने, रिकॉर्ड में मौजूद गलतियों को सुधारने और जरूरी बदलाव करने की प्रक्रिया होती है। इस तरह SIR में व्यापक सत्यापन पर जोर रहता है, जबकि SSR मौजूदा सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया है।

देशव्यापी SSR नहीं कराए जाने को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी अलग-अलग मत सामने आने की बात कही गई है। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 1 जनवरी 2025 के बाद देशव्यापी SSR नहीं कराए जाने पर आपत्ति जताई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने पिछले कुछ महीनों के दौरान निर्णय लेने की प्रक्रिया से जुड़े मामलों में 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं।

इन आपत्तियों में मतदाता सूची से नाम हटाने और उससे जुड़े मामलों सहित विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया से संबंधित मुद्दे शामिल बताए गए हैं। हालांकि चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग मत और टिप्पणियां सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।

आयोग की ओर से यह भी कहा गया कि पिछले एक वर्ष में लिए गए उसके सभी आदेश और फैसले सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम रहे हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित फैसलों में भी आयोग के भीतर पूरी सहमति होने की बात कही गई है। इस तरह सामने आई अलग-अलग टिप्पणियों को अंतिम निर्णय से अलग प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है।

देशभर में SSR कराने के मामले में जनगणना की प्रक्रिया भी एक चुनौती है। जनगणना का पहला चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के बीच निर्धारित था। वहीं लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले क्षेत्रों में दूसरा चरण चल रहा है। अगले वर्ष की शुरुआत में विधानसभा चुनाव वाले राज्यों को देखते हुए संबंधित कार्यक्रम में बदलाव किया गया है।


  • चुनावी राज्यों में प्रस्तावित SSR जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 21 के तहत किया जाएगा। इस प्रावधान में प्रत्येक चुनाव या उपचुनाव से पहले संबंधित अर्हता तिथि के आधार पर मतदाता सूची के पुनरीक्षण की व्यवस्था है। इसी प्रक्रिया के तहत पांच राज्यों में चुनाव से पहले मतदाता सूचियों को अपडेट करने की तैयारी की जा सकती है।

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