
नई दिल्ली ।अभिनेता नाना पाटेकर (Nana Patekar) के निधन के बाद उनके करीबी दोस्त और फोटोग्राफर अतुल कस्बेकर (Atul Kasbekar) ने उनसे जुड़ा एक पुराना किस्सा साझा किया है। इस प्रसंग में नाना का ऐसा अंदाज सामने आया, जो उनकी बेबाकी और अलग तरह के हास्य को दर्शाता है। अतुल के मुताबिक, नाना ने अपने फार्महाउस (Farmhouse) पर अपने अंतिम संस्कार (Funeral) के लिए लकड़ियां ( Firewood)पहले से जमा करके रखी थीं। उन्होंने उन लकड़ियों को सुखाकर भी रखा था। इसकी वजह बताते हुए नाना ने कहा था कि गीली लकड़ियों से धुआं निकलेगा और लोग उसी धुएं से आंखों में पानी आने के कारण रोने लगेंगे। इस किस्से को याद करते हुए अतुल ने नाना के व्यक्तित्व के कई पहलुओं का जिक्र किया।
अतुल कस्बेकर ने नाना पाटेकर को याद करते हुए उनकी एक श्वेत-श्याम तस्वीर साझा की थी। उन्होंने बताया कि दोनों के बीच आत्मीयता भरा रिश्ता था। भले ही उनकी मुलाकातें अक्सर नहीं होती थीं, लेकिन जब भी वे मिलते थे, ऐसा लगता था कि पिछली मुलाकात हाल ही में हुई हो। अतुल ने नाना को अप्रत्याशित, गंभीर स्वभाव वाला और अपने सिद्धांतों पर चलने वाला व्यक्ति बताया। उनके अनुसार, नाना की मौजूदगी का असर फिल्म के सेट पर भी दिखाई देता था। उनके व्यक्तित्व में एक ओर सख्ती और गहनता थी, तो दूसरी ओर अपनेपन और हास्य की अलग शैली भी थी।
अतुल ने पुणे स्थित नाना के फार्महाउस पर हुई एक मुलाकात का भी जिक्र किया। वह वहां एक फोटो सीरीज के लिए शूटिंग करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने नाना को अपने सहयोगियों के साथ जिस तरह व्यवहार करते देखा, वह उनके लिए यादगार बन गया। नाना के सहायक, स्पॉट बॉय और ड्राइवर सहित टीम के सदस्य मुख्य डाइनिंग एरिया में एक साथ बैठे थे। नाना खुद उनके पास जाकर रोटियां परोस रहे थे और अपने मशहूर मटन की अतिरिक्त मात्रा भी दे रहे थे। अतुल के मुताबिक, नाना ने वहां किसी के साथ पद या हैसियत के आधार पर अलग व्यवहार नहीं किया। वह अपने सहयोगियों के बीच सहजता से मौजूद थे और सभी को भोजन परोस रहे थे।
फार्महाउस घुमाते समय नाना ने अतुल को अपना जिम भी दिखाया। अतुल ने बताया कि नाना ने बिना वार्मअप किए करीब एक दर्जन ट्राइसेप डिप्स करके दिखाए। उनके इस अंदाज को अतुल ने मजाकिया रूप में दिखावा करने जैसा बताया। हालांकि, इस मुलाकात का सबसे यादगार हिस्सा वह था, जब नाना ने उन्हें अपने अंतिम संस्कार के लिए जमा की गई लकड़ियां दिखाईं। अतुल के अनुसार, नाना ने लकड़ियों को पहले से सुखाकर रखा था और इसके पीछे की वजह भी उन्हें बताई थी।
नाना ने अतुल से कहा था कि यदि अंतिम संस्कार के लिए गीली लकड़ियों का इस्तेमाल किया गया, तो उनसे काफी धुआं निकलेगा। ऐसे में वहां मौजूद लोगों की आंखों में धुएं के कारण पानी आ सकता है और वे रोने लग सकते हैं। नाना नहीं चाहते थे कि उनके अंतिम संस्कार में लोग धुएं के कारण आंसू बहाएं। मृत्यु और अंतिम संस्कार जैसे गंभीर विषय पर उनका यह मजाकिया नजरिया अतुल के लिए चौंकाने वाला था। इस किस्से में नाना का वही बेबाक अंदाज दिखाई देता है, जिसके लिए उन्हें जाना जाता था।
अतुल ने इस प्रसंग के जरिए नाना के व्यक्तित्व के उस पहलू को याद किया, जिसमें गंभीर बातों के बीच भी हास्य मौजूद रहता था। उनके मुताबिक, नाना अपने अंतिम संस्कार जैसी बात को भी अपने खास अंदाज में मजाकिया बना सकते थे। नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर को 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। उनके जाने के बाद अतुल द्वारा साझा किया गया यह पुराना किस्सा अभिनेता के निजी जीवन, अपने सहयोगियों के प्रति व्यवहार और उनकी अनोखी हास्य शैली की याद दिलाता है।
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