
चेन्नई । कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Congress MP Rahul Gandhi) ने कहा कि लोकतंत्र को खत्म करने वालों को (Those who destroy Democracy) इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी (Will have to pay the Price) ।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार शाम तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई स्थित आइलैंड ग्राउंड्स में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला। कोटा, देहरादून, प्रयागराज, पुणे और इंदौर के बाद पहली बार दक्षिण भारत पहुंचे राहुल गांधी ने कहा कि देश में लोकतंत्र, शिक्षा, वोट और भाषाई पहचान पर चौतरफा हमला हो रहा है, लेकिन युवाओं को डरने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि “लोकतंत्र को खत्म करने वालों का खेल अब खत्म हो चुका है।” दक्षिण के युवाओं पर नजर, पेरियार और तमिल अस्मिता का उल्लेख ‘यूथ इन इंडिया 2022’ की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण भारत के 5 राज्यों (तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना) में 15 से 29 वर्ष के लगभग 7.5 करोड़ युवा हैं। राहुल गांधी का मुख्य फोकस इसी युवा शक्ति को अपने संवाद से जोड़ना रहा। कार्यक्रम में द्रविड़ आंदोलन के प्रणेता पेरियार का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि पेरियार महान इसलिए थे क्योंकि उन्होंने सवाल पूछना सिखाया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार तमिलनाडु पर हिंदी थोपने की कोशिश कर रही है और तमिल संस्कृति व इतिहास को दोयम दर्जे पर धकेल रही है।
राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अंतरराष्ट्रीय और वित्तीय ताकतों के भारी दबाव में हैं और अपने राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, “देश का मूड जनता जान चुकी है। 15 साल से चला आ रहा गेम अब खत्म हो गया है। लोकतंत्र को खत्म करने वालों को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।” शनिवार को दिल्ली में सीजेपी और छात्र संगठनों के प्रदर्शन पर हुई पुलिसिया कार्रवाई का जिक्र करते हुए राहुल ने कहा कि राजधानी में इंटरनेट बंद कर दिया गया, शहर को ठप किया गया और छात्रों व युवाओं को लाठियों से पीटा गया।
राहुल गांधी ने शिक्षा के केंद्रीयकरण का विरोध करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति के बहाने तमिलनाडु के स्कूलों का 3300 करोड़ रुपये का बजट घटाया जा रहा है और 87% एमबीबीएस सीटों पर प्रभाव डाला जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि 70% विश्वविद्यालयों में स्थायी कुलपति नहीं हैं और उन्हें राजभवनों के जरिए नियंत्रित किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आने वाले परिसीमन के जरिए दक्षिण भारत और विशेष रूप से तमिलनाडु की राजनीतिक ताकत व संसद में उनकी आवाज को दबाने की योजना बनाई जा रही है। संवाद के दौरान नीट पेपर लीक के कारण जान गंवाने वाली एक दलित छात्रा के भाई ने मंच से अपनी पीड़ा बयां की और बताया कि किस तरह शिक्षा ही हाशिए पर खड़े परिवारों के लिए आगे बढ़ने का एकमात्र जरिया है। वहीं, एक अन्य ग्रामीण छात्र ने टू-लैंग्वेज पॉलिसी, अंग्रेजी की बाध्यता और शिक्षा के निजीकरण को लेकर अपनी चिंताएं रखीं।
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