
उज्जैन। सात दिवसीय उमा-सांझी महोत्सव के समापन पर सोमवार शाम श्री महाकालेश्वर मंदिर से माता उमा की सवारी निकाली गई। मंदिर के सभामंडप में विधि-विधान से पूजन के बाद माता उमा की चांदी की प्रतिमा को रजत पालकी में विराजित किया गया। मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल ने सलामी देकर सवारी को रवाना किया। सवारी में घुड़सवार, पुलिस बल और महाकाल मंदिर प्रबंध समिति का बैंड शामिल रहा।
सवारी में डोल रथ पर गरुड़ पर विराजित माता की पीतल की प्रतिमा और भगवान महेश भी शामिल थे। महाकाल चौराहा, महाकाल घाटी और तोपखाना होते हुए सवारी दौलतगंज चौराहा, नई सड़क, कंठाल, सराफा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर और पटनी बाजार से होकर शिप्रा तट पहुंची। रामघाट पर जवारे और सांझी का विसर्जन कर पूजन किया गया। इसके बाद सवारी कहारवाड़ी, बक्षी बाजार और महाकाल रोड होते हुए मंदिर लौटी।
सात दिन तक सजी सांझी, हुए धार्मिक आयोजन
महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से श्राद्ध पक्ष में आयोजित उमा-सांझी महोत्सव 6 से 12 अक्टूबर तक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सात दिवसीय आयोजन में मंदिर के पुजारियों और पुरोहितों ने विधि-विधान से धार्मिक अनुष्ठान किए। प्राचीन सांझी की शिला पर प्रतिदिन आकर्षक रंगोलियां सजाई गईं। भगवान महाकालेश्वर के विभिन्न स्वरूपों के मुखौटों से झांकियां भी तैयार की गईं। महोत्सव के अंतिम दिन माता उमा की सवारी निकाली गई और रामघाट पर विसर्जन की परंपरा निभाई गई। आयोजन के जरिए उज्जैन की प्राचीन धार्मिक परंपराओं और सांझी कला की झलक देखने को मिली।
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