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इंदौर को नहीं मिल सके नए अपर कलेक्टर तो प्राधिकरण में फिर से प्रमोटी आईएएस की पोस्टिंग

October 14, 2026

  • बिना एडीएम के ही दो महीने से चल रहा है इंदौर जिला तो प्राधिकरण में केरकेट्टा की पदस्थापना

इंदौर। कल आधी रात को लगभग दो दर्जन आईएएस सहित अन्य अधिकारियों की तबादला सूची शासन ने जारी की, जिसने इंदौर निगम में पदस्थ रहे और भागीरथपुरा कांड के चलते हटाए गए रोहित सिसोनिया को कलेक्टर रायसेन बनाया गया, तो इंदौर में ही अपर कलेक्टर रहे पवन जैन भिंड के कलेक्टर और प्राधिकरण सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़े शाजापुर कलेक्टर बनाए गए हैं, जबकि इंदौर कलेक्ट्रेट में तो दो से तीन अपर कलेक्टरों की जरूरत है और कल की सूची में एक भी अपर कलेक्टर नहीं मिला।

इंदौर जैसा प्रदेश का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण जिला बीते दो माह से एडीएम विहीन ही है। दो ही अपर कलेक्टर रिंकेश वैश्य और नवजीवन पंवार सारा कामकाज देख रहे हैं, जिसमें प्रोटोकॉल सहित अन्य ड्यूटी भी शामिल है। कलेक्टर भी शासन से अनुरोध कर चुके हैं कि इंदौर जैसे जिले में कम से कम 4 से 5 अपर कलेक्टर चाहिए, लेकिन कल रात की सूची में भी एक भी अपर कलेक्टर की पदस्थापना नहीं हुई। वहीं प्राधिकरण में भी एक बार फिर डायरेक्टर के बजाय प्रमोटी आईएएस को सीईओ का जिम्मा मिला है। मुख्यमंत्री के उपसचिव और भोपाल विकास प्राधिकरण के भी सीईओ रह चुके संदीप केरकेट्टा को नया सीईओ पदस्थ किया गया है।


  • हालांकि इस पद के लिए पिछले कुछ दिनों से पुराना नाम रोहन सक्सेना का भी चल रहा था। मगर सूत्रों के मुताबिक, मुख्य सचिव की पसंद के चलते केरकेट्टा को प्राधिकरण सीईओ के रूप में भेजा गया है, जो संभवत: एक-दो दिन में कार्यभार ग्रहण करेंगे। अभी जो प्राधिकरण सीईओ डॉ. झाड़े पदस्थ रहे वे डायरेक्ट आईएएस हैं और यही कारण है कि उन्हें अपनी इंदौर की पदस्थापना के लगभग सालभर के भीतर ही कलेक्टर बनने का मौका मिल गया। कल रात 23 आईएएस अधिकारियों की तबादला सूची जारी हुई, जिसमें मुख्यमंत्री के नए प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह बनाए गए, तो दूसरी तरफ भरत यादव, जो पहले सीएमओ से बाहर हुए थे, अब उन्हें महत्वपूर्ण जनसम्पर्क विभाग का बतौर सचिव अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वे एमपीआरडीसी के एमडी की जिम्मेदारी भी संभालते रहेंगे। दूसरी तरफ नगर निगम में आधा दर्जन से ज्यादा अपर आयुक्त और उपायुक्त पदस्थ हैं और इनमें से अधिकांश का कामकाज अभी तक प्रभावहीन ही रहा है। दूसरी तरफ प्रशासन के पास योग्य अफसरों की कमी है।

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