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70 साल के NEET अभ्यर्थी को झटका, MBBS में बुजुर्गों के लिए 1% आरक्षण की मांग वाली याचिका खारिज

October 21, 2026

नई दिल्ली। एमबीबीएस (MBBS) और अन्य मेडिकल कोर्सों में दाखिले के लिए वरिष्ठ नागरिकों को एक प्रतिशत आरक्षण (Reservation) या विशेष कोटा देने की मांग को इलाहाबाद हाईकोर्ट (HC) से झटका लगा है। अदालत ने 70 वर्षीय नीट यूजी अभ्यर्थी अशोक बहार की विशेष अपील खारिज कर दी है। बहार ने नीट यूजी 2026 की परीक्षा में हिस्सा लिया था और वरिष्ठ नागरिकों के लिए मेडिकल प्रवेश में आरक्षण की मांग की थी। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि आरक्षण से जुड़ा नीतिगत निर्णय लेना सक्षम विधायिका या संबंधित सरकार का काम है, अदालत का नहीं।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, पीठ ने कहा कि मौजूदा समय में ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है, जिसके तहत वरिष्ठ नागरिकों को प्रस्तावित आरक्षण दिया जा सके। याचिकाकर्ता की मांग में ऐसा कोई कानूनी अधिकार भी शामिल नहीं है, जिसके आधार पर अदालत परमादेश जारी कर सके। परमादेश एक न्यायिक आदेश होता है, जिसके जरिए किसी सरकारी प्राधिकरण या अधिकारी को उसका कानूनी दायित्व पूरा करने का निर्देश दिया जाता है।

अदालत ने टिप्पणी की कि एमबीबीएस और अन्य मेडिकल कोर्सों में दाखिले के लिए पात्र वरिष्ठ नागरिकों को आरक्षण देने की मांग ऐसे अधिकार पर आधारित नहीं है, जिसे कानूनी रूप से लागू कराया जा सके।

बहार ने क्या मांग की थी?

अशोक बहार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर संबंधित अधिकारियों को वरिष्ठ नागरिकों के लिए मेडिकल प्रवेश में एक प्रतिशत आरक्षण या विशेष कोटा देने पर नीतिगत निर्णय लेने का निर्देश देने की मांग की थी। उन्होंने आग्रह किया था कि नीट के माध्यम से एमबीबीएस और अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए पात्र बुजुर्ग अभ्यर्थियों को विशेष अवसर देने के प्रस्ताव पर विचार किया जाए।



  • याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की थी कि अधिकारियों को 23 जून 2026 को दिए गए उनके लंबित आवेदन पर निर्धारित समयसीमा के भीतर उचित कारणों के साथ फैसला सुनाने का निर्देश दिया जाए।

    एकल न्यायाधीश ने भी खारिज की थी याचिका

    इससे पहले हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश ने याचिका को नीतिगत मामला बताते हुए खारिज कर दिया था। अदालत ने कहा था कि इस तरह के आरक्षण की मांग पर सरकार या संबंधित प्राधिकरण को निर्णय लेना है और इसके लिए परमादेश जारी नहीं किया जा सकता।

    एकल न्यायाधीश के इस फैसले को चुनौती देते हुए अशोक बहार ने खंडपीठ में विशेष अपील दायर की थी। हालांकि, खंडपीठ को पहले के आदेश में कोई त्रुटि नहीं मिली और उसने अपील खारिज कर दी।

    एनटीए ने कहा- सरकार के अधिकार क्षेत्र का मामला

    सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के वकील ने दलील दी कि एजेंसी की भूमिका परीक्षा आयोजित करने तक सीमित है। वह एमबीबीएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश से संबंधित मौजूदा कानूनों और नीतियों के अनुसार काम करती है।

    एनटीए की ओर से अदालत को बताया गया कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए जिस आरक्षण की मांग की जा रही है, उसके संबंध में फिलहाल कोई प्रावधान मौजूद नहीं है। यह विषय संबंधित विधायिका या सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।

    पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता इस मुद्दे को कार्यपालिका या विधायिका के समक्ष उठा सकता है, लेकिन मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए परमादेश जारी करने का कोई आधार नहीं बनता। अदालत ने यह भी कहा कि मेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए आयु सीमा तय करना, जहां ऐसा कोई प्रतिबंध पहले से निर्धारित नहीं है, कार्यपालिका या विधायिका के अधिकार क्षेत्र का विषय है।

    अशोक बहार ने क्या दी थी दलील?

    अशोक बहार की ओर से पेश वकील पंकज धीर सिंह राणा ने दलील दी थी कि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ साल पहले नीट यूजी परीक्षा में शामिल होने के लिए अधिकतम आयु सीमा हटा दी थी। उनके मुताबिक, इससे यह स्पष्ट होता है कि वरिष्ठ नागरिक भी मेडिकल शिक्षा हासिल करने का विकल्प चुन सकते हैं।

    याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि दिव्यांगों, स्वतंत्रता सेनानियों, पूर्व सैनिकों और खिलाड़ियों को विभिन्न व्यवस्थाओं के तहत आरक्षण या विशेष लाभ मिलते हैं, लेकिन वरिष्ठ नागरिकों के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।

    याचिका में केंद्र सरकार की मौजूदा नीति को मनमाना और तर्कहीन बताते हुए आरोप लगाया गया था कि यह प्रशासन में निष्पक्षता और पारदर्शिता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों के आधार पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए आरक्षण लागू करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया।

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