
नई दिल्ली। 1987 में दूरदर्शन पर प्रसारित हुई रामानंद सागर (Ramanand Sagar)की रामायण (Ramayana)भारतीय टेलीविजन (Indian Television)के इतिहास का एक यादगार धारावाहिक बन गई थी। इस शो ने भगवान राम की कथा को घर-घर तक पहुंचाया और इसके किरदारों को दर्शकों के बीच विशेष पहचान दिलाई। रामायण की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके प्रसारण के दौरान कई जगहों पर लोग अपना काम रोककर टीवी के सामने बैठ जाते थे। हालांकि इस धारावाहिक की सफलता के बाद इसकी आगे की कहानी यानी लव-कुश की कथा को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हुआ जिसने निर्माता रामानंद सागर को कानूनी मुश्किलों में डाल दिया। सीता वनवास से जुड़े एक एपिसोड के प्रसारण पर रोक लगाने की मांग उठी और मामला अदालत तक पहुंच गया।
रामानंद सागर की रामायण 1987 से 1988 के बीच प्रसारित हुई थी और इसके कुल 78 एपिसोड दिखाए गए थे। यह धारावाहिक मुख्य रूप से गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस पर आधारित था। रामानंद सागर इसी ग्रंथ के अनुसार कथा को आगे बढ़ाते हुए धारावाहिक का समापन करना चाहते थे। लेकिन रामायण खत्म होने के बाद दर्शकों और विभिन्न संगठनों की ओर से लव-कुश की कहानी दिखाने की मांग तेज होने लगी। इसके बाद उत्तर रामायण बनाने की तैयारी शुरू हुई। हालांकि रामानंद सागर इस कहानी को लेकर सहज नहीं थे।
सागरवर्ल्ड पर प्रेम सागर के ब्लॉग के अनुसार रामानंद सागर इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रहे थे कि भगवान राम अपनी गर्भवती पत्नी सीता को एक धोबी की बात पर वनवास भेज देंगे। तुलसीदास की रामचरितमानस में लव-कुश की कथा का विस्तृत वर्णन नहीं होने के कारण भी वह इस कहानी को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं थे। दूसरी ओर वाल्मीकि समाज की ओर से मांग की जा रही थी कि रामायण की कथा को वाल्मीकि रामायण के आधार पर पूरा दिखाया जाए। बताया जाता है कि इस विषय पर रामानंद सागर तक प्रधानमंत्री कार्यालय से भी संपर्क किया गया था और दूरदर्शन के अधिकारियों के सामने भी यह मुद्दा रखा गया था।
लगातार बढ़ते दबाव के बाद दूरदर्शन ने रामानंद सागर को लव-कुश की कहानी तैयार करने की अनुमति दी। हालांकि इसके लिए विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर कथा प्रस्तुत करने की शर्त रखी गई थी। इसके बाद रामानंद सागर ने रामायण के अलग-अलग संस्करणों का अध्ययन किया। इसी दौरान उन्हें राधेश्याम द्वारा रचित रामायण का एक संस्करण मिला जिसमें माता सीता के अयोध्या छोड़ने की घटना को अलग तरीके से प्रस्तुत किया गया था।
इसी संस्करण के आधार पर सीता वनवास का एपिसोड तैयार किया गया। इसमें दिखाया गया कि भगवान राम सीता को वनवास जाने के लिए नहीं कहते बल्कि माता सीता स्वयं अपने पति की मर्यादा और सम्मान बनाए रखने के लिए अयोध्या छोड़ने का फैसला करती हैं। लेकिन इस प्रस्तुति को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
प्रेम सागर के ब्लॉग के मुताबिक जिस दिन इस एपिसोड का प्रसारण होना था उस दिन रामानंद सागर दूरदर्शन कार्यालय में मौजूद थे। प्रसारण से करीब एक घंटे पहले धीरेंद्र ब्रह्मचारी वहां पहुंचे और एपिसोड को रोकने की मांग की। हालांकि रामानंद सागर ने उनकी बात नहीं मानी और एपिसोड का प्रसारण हो गया। इसके बाद दर्शकों के एक वर्ग ने रामायण की मूल कथा से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया। विवाद इतना बढ़ा कि रामानंद सागर के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में मामला दर्ज हो गया। रिपोर्ट के अनुसार यह मुकदमा करीब दस वर्षों तक चला। इस तरह लव-कुश की कथा और सीता वनवास का एक एपिसोड रामानंद सागर के करियर के सबसे चर्चित विवादों में शामिल हो गया।
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