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राहुल गांधी की रैली पर विवाद, 1984 दंगा पीड़ित अमित शाह को लिखेंगे पत्र

October 25, 2026

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान (Ramlila Maidan) में प्रस्तावित रैली को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। वर्ष 1984 के सिख विरोधी (Anti-Sikh) दंगों से प्रभावित कुछ परिवारों के प्रतिनिधियों ने रैली के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर रैली की अनुमति नहीं देने की मांग करेंगे। दूसरी ओर, कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि इंडिया ब्लॉक की प्रस्तावित रैली निर्धारित तारीख पर ही होगी।

रैली को लेकर राजनीतिक विवाद के साथ दिल्ली के व्यापारियों की चिंताएं भी सामने आई हैं। व्यापारिक संगठनों ने दीपावली के बाद के व्यस्त कारोबारी समय और संभावित भीड़ के मद्देनजर कार्यक्रम की तारीख बदलने की अपील की है।

क्यों विरोध कर रहे हैं 1984 दंगा पीड़ित?



  • रैली का विरोध कर रहे पीड़ित परिवारों के प्रतिनिधियों ने कांग्रेस नेतृत्व की भूमिका और राहुल गांधी के पुराने बयानों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वर्ष 1984 की हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों की पीड़ा और न्याय की मांगों को राजनीतिक चर्चाओं में पर्याप्त संवेदनशीलता के साथ नहीं उठाया गया।

    पीड़ितों ने हिंसा के दौरान हुई हत्याओं, गुरुद्वारों को नुकसान पहुंचाए जाने और महिलाओं के साथ कथित ज्यादतियों का उल्लेख करते हुए न्याय की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया, उनके लिए यह घटना केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवनभर का दर्द है।

    विरोध का समर्थन कर रहे परिवारों ने कांग्रेस नेतृत्व से प्रभावित समुदाय की भावनाओं को समझने और उनकी शिकायतों को गंभीरता से लेने की अपील की है।

    मुआवजे और न्याय की प्रक्रिया पर भी सवाल

    पीड़ित परिवारों के प्रतिनिधियों ने मुआवजे और न्याय की प्रक्रिया पर असंतोष जताया है। उनका आरोप है कि कई परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता नहीं मिली, जबकि कुछ मामलों में शिकायत दर्ज कराने और पीड़ितों की पहचान से जुड़ी प्रक्रियाओं में भी कमियां रहीं।

    उनके मुताबिक, हिंसा में परिवार के सदस्यों को खोने के साथ कई लोगों को घर, संपत्ति और आजीविका के साधनों से भी हाथ धोना पड़ा। इसके कारण प्रभावित परिवारों को लंबे समय तक आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।

    पीड़ितों ने सवाल उठाया है कि दशकों बीतने के बाद भी उनकी समस्याओं और न्याय की मांगों को पर्याप्त महत्व क्यों नहीं मिला। उनका कहना है कि संवेदनशील मुद्दों से जुड़े राजनीतिक कार्यक्रमों में प्रभावित परिवारों की भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।

    महिला पीड़िता ने भी जताया विरोध

    1984 की हिंसा से प्रभावित एक महिला ने भी प्रस्तावित रैली का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि हिंसा में अपने परिजनों को खोने वाले परिवारों के लिए उस दौर की यादें आज भी दर्दनाक हैं।

    महिला के अनुसार, राजनीतिक कार्यक्रमों और चुनावी गतिविधियों से पहले प्रभावित परिवारों की स्थिति और उनकी भावनाओं को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि रैली आयोजित होती है, तो पीड़ित परिवार विरोध दर्ज करा सकते हैं।

    1 नवंबर को ही होगी इंडिया ब्लॉक की रैली: अलका लांबा

    विवाद के बीच कांग्रेस नेता अलका लांबा ने कहा है कि इंडिया ब्लॉक की प्रस्तावित रैली एक नवंबर को ही आयोजित की जाएगी। उन्होंने दिल्ली के व्यापारियों की ओर से तारीख बदलने की मांग के बावजूद कार्यक्रम स्थगित करने से इनकार किया है।

    लांबा ने दावा किया कि रैली में देशभर से बड़ी संख्या में लोग दिल्ली पहुंचेंगे। उन्होंने इसमें करीब 10 लाख लोगों के शामिल होने का अनुमान जताया है। यह संख्या कांग्रेस नेता का दावा है।

    कांग्रेस के अनुसार, रैली में कथित वोट चोरी, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग जैसे मुद्दे उठाए जाएंगे।

    व्यापारियों को बाजार प्रभावित होने की आशंका

    दिल्ली के व्यापारियों ने दीपावली के आसपास के व्यस्त कारोबारी समय का हवाला देते हुए रैली की तारीख बदलने की अपील की है। व्यापारिक संगठनों को आशंका है कि बड़े राजनीतिक आयोजन के कारण यातायात में बदलाव, बैरिकेडिंग और भीड़ की स्थिति बन सकती है।

    इसका असर बाजारों तक ग्राहकों की पहुंच और कारोबार पर पड़ने की चिंता जताई गई है। हालांकि, कांग्रेस ने फिलहाल कार्यक्रम की तारीख में बदलाव से इनकार किया है।

    इस तरह एक नवंबर को प्रस्तावित रैली को लेकर जहां 1984 दंगा पीड़ित परिवार विरोध की तैयारी कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ने पर कायम है।

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