
इन्दौर। राजस्व प्रकरणों के निराकरण में अधिकारियों के तबादले और नई स्थापना के बाद हजारों प्रकरण पेंडिंग हो गए हैं। हाल ही में कलेक्टर द्वारा ली गई बैठक के बाद सामने आया था कि नामांतरण, बंटवारे और अभिलेख दुरुस्ती जैसे आम लोगों से सीधे जुड़े मामलों में हजारों प्रकरण अब भी लंबित हैं। स्थिति यह है कि कई मामलों में छह महीने से लेकर एक साल और दो साल तक पुराने प्रकरण भी निराकरण का इंतजार कर रहे हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति अभिलेख दुरुस्ती की है, जहां कुल दर्ज प्रकरणों में से एक तिहाई का ही निराकरण हो पाया है।
हाल ही में कलेक्टर द्वारा ली गई समीक्षा बैठक के आंकड़ों के अनुसार पूर्व में चलाए गए अभियान के बाद 1 साल 3 महीने 6 महीने के प्रकरणों की संख्या दो अंको तक सीमित कर रह गई थी, लेकिन अब यही आंकड़ा तीन अंको को पार कर रहा है। इंदौर जिले में 10 तहसीलों के अनुविभागीय अधिकारियों के साथ-साथ भारी तादाद में संयुक्त कलेक्टर 59तहसीलदारों की फौज है। फिर भी 1 साल से पेंडिंग पड़े मामले में140तक पहुंच गए है, वही 6 माह से अधिक समय से 700 से अधिक प्रकरण लटके हुए हैं।
नामांतरण के 6651 मामले अब भी लंबित
अविवादित नामांतरण के 39,996 प्रकरण दर्ज हुए, जिनमें से 33,627 का निराकरण किया गया है। इसके बावजूद 6369 मामले लंबित हैं। इनमें 6335 प्रकरण तीन महीने तक की अवधि के हैं, जबकि 32 मामले तीन से छह महीने और दो मामले एक से दो साल की अवधि से लंबित हैं। विवादित नामांतरण के 2168 प्रकरणों में से 1886 का निराकरण हुआ है और 282 मामले बाकी हैं। इनमें 277 मामले तीन महीने तक तथा चार मामले तीन से छह महीने की अवधि से लंबित हैं।
कागजों में सुधार भी नहीं कर पा रहे
पोर्टल परअभिलेख दुरुस्ती के कुल 2918 प्रकरण दर्ज हैं, जिनमें से केवल 983 का निराकरण हुआ है। इस तरह निराकरण का प्रतिशत महज 33.69 है और 1935 प्रकरण लंबित हैं। इनमें 659 मामले तीन से छह महीने, 140 मामले छह महीने से एक साल और 34 मामले एक से दो साल की अवधि से लंबित हैं। जमीन के रिकॉर्ड में सुधार के लिए लोगों को महीनों इंतजार करना पड़ रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी तेजी से काम नहीं कर पा रहे हैं।
बंटवारे में भी सैकड़ों मामले अटके
अविवादित बंटवारे के 2079 प्रकरणों में से 1506 का निराकरण हुआ है। 573 मामले लंबित हैं, जिनमें 565 तीन महीने तक और आठ तीन से छह महीने की अवधि से लंबित हैं। वहीं, विवादित बंटवारे के कुल 71 प्रकरणों में से 51 का निराकरण हुआ है और 20 मामले बाकी हैं। इनमें पांच मामले तीन से छह महीने से लंबित हैं।सीमांकन के 10,634 प्रकरणों में से 9929 का निराकरण किया गया है। निराकरण की दर 93.37 प्रतिशत है, जबकि 705 मामले अभी भी लंबित हैं। इनमें सभी मामले तीन महीने तक की अवधि के हैं।
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