
अग्रिबाण ब्रेकिंग… इंदौर में कल आयोजित अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव में निवेशकों के लिए लैंड पार्सल के रूप में करेंगे प्रस्तुत
इंदौर,राजेश ज्वेल
सालों पहले बंद हो गई हुकुमचंद मिल (Hukumchand Mill) की 42 एकड़ जमीन (42 acres of land) हाउसिंग बोर्ड (Housing Board) ने अपने कब्जे में ले ली और उस पर पहले रियल इस्टेट से जुड़ा व्यवसायिक और आवासीय प्रोजेक्ट लाने के भी प्रयास किए, मगर अब सीधे पूरी जमीन बेचने का निर्णय लिया गया है। कल इंदौर में आयोजित अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव में लैंड पार्सल के रूप में रियल इस्टेट से जुड़े निवेशकों को हुकुमचंद मिल की जमीन की जानकारी दी जाएगी। बोर्ड ने फिलहाल इसकी न्यूनतम कीमत 1200 करोड़ रुपए तय की है। मिल मजदूरों की बकाया राशि के साथ बैंकों का कर्जा व अन्य देनदारियां मिल की चुकाने पर बोर्ड को लगभग 450 करोड़ रुपए खर्च करना पड़े थे और अब अगर जमीन बिकती है तो उसे 800 करोड़ रुपए का मुनाफा होगा। इसमें से आधी राशि यानी 400 करोड़ इंदौर नगर निगम को प्राप्त होंगे, क्योंकि मिल की जमीन का मूल मालिक हाईकोर्ट ने निगम को ही घोषित किया था।
इंदौर हाईकोर्ट में मिल मजदूरों द्वारा अपनी जमा पूंजी हासिल करने के लिए लम्बी लड़ाई लड़ी और पहले मुंबई डीआरटी ने इस जमीन को ऑनलाइन टेंडर के जरिए बेचना चाहा और मात्र 385 करोड़ रुपए कीमत आंकी गई। इसके बाद हाईकोर्ट के ही आदेश पर यह जमीन डीआरटी के चंगुल से छूटी और नगर निगम का मालिकाना हक भी साबित हुआ। तत्पश्चात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर हाउसिंग बोर्ड ने मजदूरों सहित अन्य देनदारियां चुकाई और जमीन अपने कब्जे में ले ली। इसके बाद अलग-अलग मॉडल के प्रोजेक्ट भी बोर्ड ने तैयार किए, जिसने पूरी जमीन को यथास्थिति में बेचने के अलावा आधी जमीन बेचकर आधी पर प्रोजेक्ट लाने और तीसरा पीपीपी मॉडल बनाया, जिसमें जॉइंट वेंचर के साथ प्रोजेक्ट लाया जाना था। मगर उसके बाद हाउसिंग बोर्ड ने अब इस जमीन को सीधे ही बेचने का निर्णय लिया है। हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष ओम जैन ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि इंदौर में आयोजित अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव में हाउसिंग बोर्ड के 9 प्रोजेक्टों को निवेशकों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें इंदौर हुकुमचंद मिल की जमीन लैंड पार्सल के रूप में प्रस्तुत की जाएगी और इसकी न्यूनतम कीमत 1200 करोड़ रुपए तय की गई है। उल्लेखनीय है कि नगरीय विकास और आवास विभाग द्वारा कल इंदौर में अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया है, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मौजूद रहेंगे और रियल इस्टेट के साथ अन्य निवेशकों से वन-टू-वन चर्चा भी करेंगे, जिसमें सस्ते आवास, शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर सौर ऊर्जा, जल प्रबंधन, इलेक्ट्रिक मोबेलिटी सहित इंदौर इकोनॉमिक रीजन विकास रूप रेखा का विमोचन भी किया जाएगा। विभागीय आयुक्त संकेतभोंडवे ने इस कॉन्क्लेव के बारे में बताया कि मुख्यमंत्री विभिन्न नगरीय विकास परियोजनाओं का भूमिपूजन और लोकार्पण भी करेंगे। वहीं अर्बन अफोर्डेबल हाउसिंग एंड हेबिटेक पॉलिसी 2026 के प्रारुप का विमोचन भी किया जाएगा। शहरी क्षेत्रों में किफायती यानी सस्ते मकानों की उपलब्धता को बढ़ाने और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के साथ मध्यप्रदेश ट्रीटेड वेस्ट वॉटर रीसाइक्लिंग एंड रीयूज पॉलिसी के प्रारुप का भी विमोचन किया जाएगा। इंदौर इकोनॉमी रीजन रिपोर्ट का भी विमोचन होगा, जिसमें 8 जिलों को शामिल करते हुए आर्थिक विकास, औद्योगिक विस्तार, आवास परिवहन, लॉजिस्टिक सहित रोजगार सृजन की दीर्घकालीन रुपरेखा प्रस्तुत होगी। इंदौर को अब होरिजोंटल की बजाय वर्टिकल ग्रोथ दी जाएगी, क्योंकि जमीनों की उपलब्धता लगातार कम हो रही है इसलिए शहर में बहुमंजिला इमारतों से जुड़े प्रोजेक्टों को अधिक महत्व दिया जाएगा। इंदौर का वर्तमान मास्टर प्लान होरिजोंटल ग्रोथ पर आधारित था, मगर अब जो 2047 का प्लान आएगा उसमें वर्टिकल ग्रोथ को बढ़ावा देंगे। कल की कॉन्क्लेव में टीडीआर और टीओडी के साथ-साथ रीडवलपमेंट और रीडेंसीफिकेशन जैसे प्रोजेक्टों पर भी विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। डिजिटल तकनीक और आधुनिक नियोजन पद्धतियों के जरिए नगरीय सेवाओं को और अधिक सुगम तथा प्रभावी बनाने पर भी विचार-विमर्श होगा। इस आयोजन में नगरीय विकास और आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिभा बागड़ी, अपर मुख्य सचिव संजय दुबे सहित जनप्रतिनिधि, निवेशक, रियल इस्टेट से जुड़े प्रतिनिधि, शहरी नियोजन विशेषज्ञ और वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। यह कॉन्क्लेव ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित की गई है। इसमें 2753 करोड़ के विकास प्रोजेक्टों को भी अमल में लाया जाएगा।
776 करोड़ नेहरू नगर-एलआईजी के री-डवलपमेंट पर होंगे खर्च
हाउसिंग बोर्ड द्वारा लैंड पार्सल के रूप में जहां हुकुमचंद मिल की 42 एकड़ जमीन विक्रय के लिए उपलब्ध कराई जाएगी, वहीं एलआईजी कॉलोनी, नेहरू नगर के पुराने जर्जर मकानों को तोडकऱ उनकी जगह नई बहुमंजिला इमारतें बनेंगी। इस प्रोजेक्ट पर 776 करोड़ खर्च होना है। इसी तरह जबलपुर, भोपाल, ग्वालियर सहित कुल 9महत्वपूर्ण प्रोजेक्टों पर हाउसिंग बोर्ड अध्यक्ष ओम जैन के मुताबिक इस अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव में फोकस किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में हाउसिंग बोर्ड ने नई आईकॉनिक जो योजनाएं तैयार की हैं उनकी जानकारी निवेशकों के समक्ष रखी जाएगी। श्री जैन के मुताबिक हाउसिंग बोर्ड ने अपनी स्थापना से लेकर अभी तक इंदौर सहित प्रदेशभर के शहरों में साढ़े 3 लाख से ज्यादा विभिन्न श्रेणी के रहवासी मकानों-भूखंडों को उपलब्ध कराया है।
350 वर्ग किलोमीटर हो गया इंदौर का बिल्टअप एरिया
चारों दिशाओं में इंदौर का तेजी से विस्तार हो रहा है। अभी एक जियो स्पेशियल स्टडी के मुताबिक बीते तीन दशकों में सवा 400 फीसदी से अधिक इंदौर का बिल्टअप एरिया बढ़ गया है। 1995 में मात्र 62 स्क्वेयर किलोमीटर एरिया था, जो अब 2026 में 350 स्क्वेयर किलोमीटर तक पहुंच गया है। सुपर कॉरिडोर, इंदौर-उज्जैन रोड, बायपास और कनाडिय़ा रोड पर ही सबसे ज्यादा आवासीय और व्यवसायिक प्रोजेक्ट आए हैं। बिल्टअप एरिया बढऩे के साथ-साथ इंदौर की आबादी में भी तेजी से विस्तार हुआ है। हालांकि इसके चलते सीमेंट कांक्रीट के जंगल में भी इंदौर तब्दील हो रहा है और खेती के साथ-साथ खुली जमीनें लगातार कम होती जा रही है। विभिन्न प्रोजेक्टों के चलते हरे-भरे पेड़ों की लगातार कटाई भी चल रही है, जिसके चलते ग्रीन एरिया भी शहर के बीच कम होता जा रहा है, जिसके कारण प्रदूषण के साथ-साथ गर्मी का असर बढ़ रहा है। आने वाले समय में यातायात के साथ-साथ जल प्रबंधन एक बड़ी चुनौती भी रहेगी, क्योंकि वर्तमान में ही शहर इन समस्याओं से जूझ रहा है। 2040 तक यह बिल्टअप एरिया सवा 400 स्क्वेयर किलोमीटर तक पहुंच जाने का अनुमान लगाया गया है। अभी अगले साल जनगणना होगी, उससे बढ़ी आबादी के सटीक आंकड़े भी प्राप्त हो जएंगे।
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