
इंदौर। इंदौर के देवी अहिल्याबाई होलकर विमानतल के वीआईपी लाउंज में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के साथ अभद्रता के मामले में जांच के दौरान सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी गंभीर खामियां सामने आई हैं। गोवा जाने वाली फ्लाइट में सवार नहीं हो पाने के बाद हंगामा करने वाले यात्री को पहली बार टर्मिनल से बाहर निकाला गया था, लेकिन वह दोबारा उसी टिकट को दिखाकर टर्मिनल में प्रवेश कर गया। हैरानी की बात यह है कि उसकी फ्लाइट रवाना हो चुकी थी, इसके बावजूद उसे प्रवेश मिल गया और बाद में उसने सुमित्रा महाजन के साथ अभद्रता की।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जितेंद्र दामने नाम का यात्री रविवार शाम 5.25 बजे गोवा जाने वाली इंडिगो की फ्लाइट (6ई-885) से जाने के लिए एयरपोर्ट पहुंचा था। उसके दोस्त विमान में सवार हो गए, लेकिन देर से पहुंचने के कारण बोर्डिंग गेट बंद होने पर उसे यात्रा की अनुमति नहीं मिली। बताया जा रहा है कि नशे की हालत में उसने हंगामा किया, जिसके बाद उसे एयर लाइंस स्टाफ ने सीआईएसएफ की मदद से टर्मिनल से बाहर कर दिया था। इसके बाद वह उसी टिकट को दिखाकर दोबारा टर्मिनल में दाखिल हो गया, जबकि संबंधित फ्लाइट रवाना हो चुकी थी।
पहली बार बाहर करने के बाद दोबारा प्रवेश कैसे मिला?
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम सवाल यही है कि पहली बार हंगामा करने के बाद बाहर निकाले गए यात्री को दोबारा प्रवेश कैसे मिल गया। जब यात्री की फ्लाइट रवाना हो चुकी थी, तब प्रवेश द्वार पर टिकट की जांच के दौरान इस तथ्य की पुष्टि क्यों नहीं हुई? साथ ही, पहली घटना के बाद संबंधित यात्री के बारे में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों के बीच किस तरह की सूचना साझा की गई थी, यह भी जांच का विषय है।
ताई से अभद्रता के बाद फिर टर्मिनल से बाहर किया
दूसरी बार टर्मिनल में प्रवेश करने के बाद यात्री की नजर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन पर पड़ी, जो वीआईपी लाउंज में जा रही थीं। वह भी खुद को पत्रकार बताते हुए उनके पीछे चला गया व फिर अभद्रता करने लगा। इस पर ताई के समर्थकों द्वारा शिकायत किए जाने पर सीआईएसएफ ने उसे फिर टर्मिनल से बाहर कर दिया गया। समर्थकों द्वारा भी उसके नशे में होने की बात कही गई थी।
दूसरी बार भी पुलिस को नहीं सौंपा
सीआईएसएफ को यात्री द्वारा पहली बार ही हंगामा किए जाने पर पुलिस को सौंपना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। हद तो तब हो गई जब ताई से अभद्रता के बाद भी उसे पुलिस को नहीं सौंपा गया, जबकि उसकी पूरी जानकारी दर्ज करते हुए उसे पुलिस को सौंपा जाना चाहिए था। इस घटनाक्रम ने एयरपोर्ट पर प्रवेश जांच, यात्रियों की निगरानी और सुरक्षा से जुड़े विभागों के बीच समन्वय की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
एयरपोर्ट प्रबंधन ने सीआईएसएफ से मांगा जवाब
पूरे मामले की तहकीकात में सिस्टम की कुछ कमियां सामने आई हैं। इसे सीधे सीआईएसएफ की लापरवाही कहना सही नहीं होगा, लेकिन इन कमियों को दूर करने के लिए जरूरी व्यवस्था तत्काल लागू कर दी गई है। पूरे घटनाक्रम को लेकर सीआईएसएफ से भी जवाब मांगा गया है। हमारा प्रयास है कि भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो।
– विक्रम ठक्कर, एयरपोर्ट डायरेक्टर, इंदौर
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