श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) के मंत्रिमंडल विस्तार (Cabinet expansion) के बाद सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (National Conference) में असंतोष खुलकर सामने आ गया है। मंगलवार को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने लोक भवन में चार नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। हालांकि, मंत्रिपरिषद में कई वरिष्ठ विधायकों को जगह नहीं मिलने से पार्टी के भीतर नाराजगी बढ़ गई। पार्टी मुख्यालय में विरोध प्रदर्शन हुआ, वहीं कुछ नेताओं ने अपनी उपेक्षा पर खुलकर नाराजगी जाहिर की।
मंत्रिमंडल विस्तार के तहत नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और सात बार के विधायक अली मोहम्मद सागर के अलावा अल्ताफ अहमद कालू, मीर सैफुल्ला और शमीमा फिरदौस को मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया है। इस विस्तार के साथ मंत्रिपरिषद की सदस्य संख्या निर्धारित अधिकतम सीमा तक पहुंच गई। वहीं, खेल एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सतीश शर्मा को मंत्रिपरिषद से हटा दिया गया।
दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग पश्चिम से विधायक अब्दुल मजीद भट लारमी को मंत्रिपरिषद में जगह नहीं मिली। नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेताओं में शामिल लारमी ने बताया कि सोमवार शाम तक उन्हें उम्मीद थी कि उनका नाम मंत्रियों की सूची में शामिल होगा, लेकिन अंतिम निर्णय में उन्हें जगह नहीं मिली।
लारमी ने कहा कि वह लंबे समय से पार्टी के प्रति वफादार रहे हैं और दक्षिण कश्मीर के वरिष्ठ नेताओं में उनकी गिनती होती है। उन्होंने कहा, “मैं इस पद का हकदार था। मैं पार्टी आलाकमान के सामने अपनी बात रखूंगा, लेकिन पार्टी नहीं छोड़ूंगा। मैं पार्टी का सिपाही हूं।”
हालांकि, उन्होंने पार्टी नेतृत्व के फैसले का सम्मान करने की बात भी कही। उनके बयान से मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने पर उनकी निराशा साफ झलकी।
कैबिनेट विस्तार से वरिष्ठ नेता मुबारक गुल भी असंतुष्ट हैं। लंबे समय से पार्टी से जुड़े गुल को मंत्रिपरिषद में जगह नहीं मिली, हालांकि उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया गया है। इस फैसले से नाराज उनके समर्थकों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस मुख्यालय में प्रदर्शन किया और ‘पार्टी से इस्तीफा दो, महासचिव मंजूर नहीं’ जैसे नारे लगाए।
मुबारक गुल ने भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें पहले भी मंत्रिपरिषद में शामिल नहीं किया गया था और इस बार भी नजरअंदाज किया गया है। प्रदर्शन से पार्टी नेतृत्व के सामने असंतुष्ट नेताओं और उनके समर्थकों को मनाने की चुनौती बढ़ गई है।
दूसरी ओर, नए मंत्री अली मोहम्मद सागर के बेटे और हजरतबल से विधायक सलमान सागर ने पार्टी के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि उनके पिता के लंबे राजनीतिक अनुभव को देखते हुए पार्टी ने उन्हें जनता की सेवा करने का एक और अवसर दिया है।
सलमान सागर ने स्वीकार किया कि कुछ नेता फैसले से नाराज हैं, लेकिन उन्होंने पार्टी में किसी बड़े मतभेद से इनकार किया। उनके मुताबिक, नाराज नेता पार्टी के स्तंभ हैं और नेतृत्व उनसे बातचीत कर उन्हें मना लेगा। सतीश शर्मा को मंत्रिपरिषद से हटाए जाने पर उन्होंने कहा कि भविष्य में उन्हें दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना हो सकती है।
मंत्री सकीना इट्टू ने भी पार्टी के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सभी को मंत्री नहीं बनाया जा सकता और जनता की सेवा करने के कई अन्य तरीके भी हैं। वहीं, मंत्री बनाई गईं शमीमा फिरदौस ने कहा कि वह पार्टी के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के मिशन को आगे बढ़ाती रहेंगी।
जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह उमर अब्दुल्ला सरकार में शामिल नहीं होगी। पार्टी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने में हो रही देरी के कारण वह सरकार से बाहर रहने के अपने फैसले पर कायम है।
वहीं, विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने नए मंत्रियों को बधाई दी। उन्होंने मंत्रियों से राजनीतिक खींचतान से ऊपर उठकर जनता की समस्याओं पर ध्यान देने की अपील की। साथ ही, मंत्रिपरिषद में जगह नहीं पाने वाले नेताओं के प्रति सहानुभूति भी जताई।
कैबिनेट विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के सामने संगठन के भीतर बढ़ती नाराजगी को दूर करने की चुनौती है। एक ओर पार्टी नेतृत्व फैसले का बचाव कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ विधायकों की निराशा और पार्टी मुख्यालय में हुए प्रदर्शन ने मंत्रिपदों के बंटवारे को लेकर असंतोष उजागर कर दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी नेतृत्व नाराज नेताओं को मनाकर संगठन में एकजुटता बनाए रखने में कितना सफल होता है।
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