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इंदौर: सैटेलाइट और जीआईएस सर्वे से पकड़ाए 595 अवैध निर्माण

October 30, 2026

  • 1392 प्रकरण स्वीकृति से ज्यादा निर्माण के भी मिले
  • 5 अवैध कॉलोनियां भी चिन्हित, अब मैदानी जांच कराएगा नगर निगम

इंदौर। नगर निगम (Municipal council) एक तरफ सम्पत्ति कर (property taxes) में नए खाते खुलवाने और चोरी पकडऩे के लिए जीआईएस सर्वे (GIS surveys) करवा रहा है, तो साथ ही अवैध निर्माणों (illegal constructions) और अतिक्रमण पर रोक लगाने के लिए भी इस सर्वे के साथ-साथ सैटेलाइट (satellite) की भी मदद ली जा रही है। निगम का दावा है कि इससे सभी 85 वार्डों में नए-पुराने निर्माणों के साथ अन्य गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सकती है। अभी निगम ने 595 ऐसे निर्माण इस सर्वे से पकड़े जो बिना किसी वैध अनुमति के बने हैं।


  • बिल्डर, कॉलोनाइजरों पर नकेल कसने के लिए निगम इस तरह के सर्वे पूर्व में भी करा चुका है, जिनमें चिन्हित किए गए अवैध बिल्डिंगों और अन्य निर्माणों पर छुटपुट कार्रवाई ही हो सकी है, जिसके चलते शत-प्रतिशत अवैध निर्माण और कॉलोनियां विकसित हो गई है। यहां तक कि आवासीय भूखंडों पर भी धड़ल्ले से व्यवसायिक निर्माण चल रहे हैं। बॉम्बे हॉस्पिटल के सामने महालक्ष्मी नगर मैन रोड से लेकर तुलसी नगर, महालक्ष्मी नगर की अंदरुनी सडक़ों पर भी होटल, होस्टल, दुकानें निर्मित हो गई है। अब निगम का दावा है कि जीआईएस और सैटेलाइट सर्वे के जरिए इन अवैध निर्माणों को चिन्हित किया जाएगा। साथ ही स्वीकृति से अधिक निर्माण भी पकड़ में आएंगे। हालांकि इस तरह का अभियान निगम पिछले 3 सालों से चला रहा है और इस दौरान 700 से अधिक स्थान चिन्हित भी किए गए। निगम इसमें मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम के अलावा प्रॉपर्टी इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल की मदद ले रहा है। इससे निर्माण गतिविधियों की मैपिंग और ट्रैकिंग की जा सकती है और जो भी स्थल चिन्हित होता है उसे एक यूनिक यानी विशेष पहचान नम्बर रेड पेज के रूप में किया जाता है। अब इसके आधार पर निगम मैदानी जांच भी करवाएगा, ताकि वास्तविक स्थिति का पता लग सके कि मौके पर किया गया निर्माण किस श्रेणी का है और वर्तमान में उसका क्या उपयोग हो रहा है। इस सर्वे को झोन और वार्ड वाइज भी सूचीबद्ध किया गया है जिससे उस क्षेत्र के भवन अधिकारी और निरीक्षक मंजूर किए गए रिकॉर्ड के मुताबिक जांच कर सकेंगे कि मौजूदा निर्मित भवन दी गई मंजूरी के आधार पर बना है अथवा नहीं और जितना क्षेत्रफल मान्य एफएआर के आधार पर दिया गया था मौके पर उससे अधिक निर्माण तो नहीं किया गया है। 5 अवैध कॉलोनियां भी इस सर्वे में चिन्हित की गई है।

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