
मौतें हुई तो नगर निगम निकल गई दूसरी होटलों के सेप्टिक टैंकों की जाँच करने-यह कार्य वर्षभर होना चाहिए लेकिन हमारे यहाँ हादसों के बाद ही नींद खुलती है
उज्जैन। श्रीगंगा होटल हादसे में अभी किसी की जिम्मेदारी तय नहीं हुई है, वहीं कल वाल्मीकि समाज के धरने में होटल मालिक की तरफ से मृतकों को 30-30 लाख रुपए देने की घोषणा हुई जो कि चेक के माध्यम से दिए जाएँगे। कल समाज के आक्रोशित लोगों ने धरना दिया था और मृतक लड़के सफाईकर्मी का काम करते थे एवं अतिरिक्त पैसों के लिए टैंक की सफाई के लिए उतरे थे।
देवास रोड स्थित श्रीगंगा होटल में शनिवार रात को फूड वेस्ट चैंबर की सफाई के दौरान चार कर्मचारियों की मौत के बाद पुलिस ने कोई प्रकरण दर्ज नहीं किया है। पुलिस और महापौर ने मामले की जांच में लापरवाही सामने आने पर संबंधितों पर कार्रवाई की बात की है। एसपी प्रदीप शर्मा ने जांच के आधार पर प्रकरण दर्ज करने की बात कही है। महापौर मुकेश टटवाल ने कहा कि हादसे की जांच होगी। जिम्मेदारी तय कर कठोर कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम स्वास्थ्य विभाग समिति के प्रभारी सत्यनारायण चौहान ने बताया कि होटल प्रबंधन ने सफाई के लिए नगर निगम से कोई रसीद नहीं कटवाई थी। निगम के पास टैंक की सफाई के लिए गाडिय़ां और मशीनें उपलब्ध हैं। ऐसे में मजदूरों को टैंक के अंदर उतारकर सफाई कराना गलत है। इधर नगर निगम ने रविवार को शहर के होटल और रेस्टोरेंट में सफाई व्यवस्था के साथ सुरक्षा इंतजामों की जांच शुरू कर दी है। होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को टैंक या चैंबर की सफाई कराने से पहले नगर निगम को सूचना देनी होगी। निगम की जानकारी और सहयोग के बिना सफाई नहीं कराई जा सकेगी। रविवार को नगर निगम के अधिकारियों ने अपना स्वीट्स, होटल आश्रय और होटल समसारा की बल्क वेस्ट जनरेटर (बीडब्ल्यूजी) इकाइयों का विशेष निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने टैंकों की सफाई, ढक्कनों की उपलब्धता, मशीनों के रखरखाव और कर्मचारियों की सुरक्षा के इंतजामों की जांच की। निरीक्षण में मिली कमियों को दूर करने के निर्देश दिए गए। निगम ने स्पष्ट किया कि लापरवाही मिलने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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