
- माह के पहले सप्ताह में पर्व होने से बाजार में बढ़ सकती है खरीददारी
उज्जैन। दीपावली की दस्तक के साथ ही घरों से बाजारों तक उत्सवी तैयारियां शुरू हो गई हैं। कहीं साफ सफाई और रंग- रोगन का दौर चल रहा है तो कहीं दुकानों पर रोशनी की झालरें, दीपक, सजावटी सामान और उपहार सजने लगे हैं। मिठाई, कपड़ा, सराफा, बर्तन और इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबारियों को त्योहार के दौरान ग्राहकी बढऩे की उम्मीद है।
इस बार नवंबर के शुरुआती सप्ताह में दीपावली होने से नौकरीपेशा परिवारों के हाथ में वेतन रहने का फायदा बाजार को मिल सकता है। हालांकि प्रदेश के कुछ इलाकों में कम बारिश के कारण प्रभावित हुई किसानों की आर्थिक स्थिति ग्रामीण बाजार की खरीदारी पर असर डाल सकती है। इस तरह दीपोत्सव के उत्साह के बीच कारोबार के सामने उम्मीद और चुनौती दोनों मौजूद हैं। दीपावली से पहले बाजारों में सबसे ज्यादा हलचल सजावटी और पूजन सामग्री की दुकानों पर दिखाई देने लगती है। बिजली की झालरें, एलईडी लाइट, बंदनवार, तोरण, मोमबत्तियां, रंगोली के रंग और मिट्टी के दीपकों की मांग को देखते हुए दुकानदारों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। पारंपरिक दीयों का कारोबार कुम्हारों के लिए भी साल के महत्वपूर्ण अवसरों में शामिल है। कपड़ा बाजार में बच्चों के परिधान, महिलाओं की साडिय़ां और सूट तथा पुरुषों के कपड़ों की खरीदारी की उम्मीद है। धनतेरस पर बर्तन और सोना-चांदी खरीदने की परंपरा के चलते सराफा और बर्तन बाजार पर भी ग्राहकों की नजर रहेगी। मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणए घरेलू सामान और फर्नीचर कारोबारियों को भी त्यौहार से बिक्री बढऩे की आस है। दीवाली का कारोबार बड़े शोरुम तक सीमित नहीं रहता। कुम्हारों, फूल विक्रेताओं, मिठाई कारोबारियों, फुटकर दुकानदारों, रंगोली सामग्री बेचने वालों और सजावट का काम करने वाले कारीगरों को भी इस पर्व से रोजगार मिलता है। घर-दुकानों की रंगाई-पुताई, सफाई, बिजली की झालरें लगाने और सजावट के काम से स्थानीय श्रमिकों को अतिरिक्त काम मिलता है। मिठाई और नमकीन की दुकानों पर भी त्यौहार के लिए विशेष तैयारियाँ होती है। इस तरह दीपोत्सव का कारोबार बाजार के छोटे-बड़े सभी वर्गों से जुड़ा रहता है। इस बार दीपावली नवंबर के शुरुआती दिनों में होने से नौकरीपेशा परिवारों के पास खरीदारी के लिए वेतन उपलब्ध रहने की संभावना है। महीने के अंतिम दिनों में घरेलू खर्चों और खरीदारी के बजट के बीच संतुलन बनाना कई परिवारों के लिए मुश्किल होता है। ऐसे में महीने की शुरुआत में त्योहार आने से कुछ परिवार अपनी जरुरतों के अनुसार खरीदारी कर सकते हैं। व्यापारियों के लिए धनतेरस से दीपावली तक का समय अहम रहेगा। हालांकि विक्री कितनी बढ़ेगी, यह ग्राहकों की क्रयशक्ति, वस्तुओं की कीमत और बाजार की मांग पर निर्भर करेगा।
धनतेरस से भाई दूज तक छह दिन चलेगा उत्सव
दीपावली से जुड़े प्रमुख पर्व 6 से 11 नवंबर तक मनाए जाएंगे। धनतेरस से शुरु होने वाला उत्सव भाई दूज तक चलेगा। इस दौरान खरीदारीए लक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा और भाई बहन के पारंपरिक त्योहार का उल्लास रहेगा।
तारीख पर्व
- 6 नवंबर धनतेरस
- 7 नवंबर छोटी दीपावली
- 8 नवंबर दीपावली एवं लक्ष्मी पूजन
- 9 नवंबर कार्तिक अमावस्या
- 10 नवंबर गोवर्धन पूजा
- 11 नवंबर भाई दूज