
- केन्द्र सरकार के सौर ऊर्जा अभियान को झटका-रिश्वतखोरी का आलम
उज्जैन। प्रधानमंत्री सूर्य घर, मुफ्त बिजली योजना में उज्जैन के लोगों ने सोलर प्लांट लगाने में बिजली कंपनी का शुरुआती लक्ष्य पार कर दिया, लेकिन स्मार्ट मीटर की कमी इसमें सबसे बड़ी बाधा बन रही है। इन दिनों शहर के कई घरों और परिसरों में सोलर पैनल व इनवर्टर लग जाने के बाद भी प्लांट शुरू नहीं हो पाए हैं।
उल्लेखनीय है कि शहर में 1000 से 1500 प्लांट का प्रारंभिक लक्ष्य था। योजना शुरू होने के बाद 2000 से ज्यादा उपभोक्ताओं ने आवेदन व रजिस्ट्रेशन कराया और 1500 प्लांट शुरू हो चुके हैं लेकिन 20 से 30 तैयार प्लांट स्मार्ट मीटर के इंतजार में अटके हैं। यानी उपभोक्ताओं ने अपनी तरफ से प्लांट लगाने की प्रक्रिया पूरी कर ली, लेकिन सिस्टम की अगली कड़ी स्मार्ट मीटर पर आकर रुक गई। इस देरी का असर सिर्फ बिजली बचत तक सीमित नहीं है। जिन उपभोक्ताओं ने बैंक से लोन लेकर प्लांट लगवाया है, उनकी ईएमआई शुरू हो चुकी है। दूसरी तरफ सामान्य बिजली बिल भी देना पड़ रहा है। स्मार्ट मीटर नहीं लगने से कमीशनिंग पूरी नहीं हो रही और इसके कारण सब्सिडी की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ पा रही। यानी प्लांट की लागत और उसकी किस्त शुरू हो गई, लेकिन जिस बचत के लिए प्लांट लगाया गया था, उसका लाभ अभी नहीं मिल रहा। शहर के महानंदा और महाश्वेता बिजली जोन के कई क्षेत्रों में उपभोक्ता तैयार प्लांट के साथ मीटर का इंतजार कर रहे हैं।