
उज्जैन। सिंहस्थ 2028 में साधु संतों को, श्रद्धालुओं को शिप्रा के जल से स्नान कराने के लिए प्रदेश सरकार ने 600 करोड़ की लागत से सिलारखेड़ी -सेवरखेड़ी प्रोजेक्ट बनाया और रिकार्ड समय में इसे पूरा करने जा रही है। इस प्रोजेक्ट का 86 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। पंपिंग स्टेशन का काम भी तेजी से हो रहा है।
सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी योजना के तहत शिप्रा नदी पर सेवरखेड़ी ग्राम में एक डेम का निर्माण किया गया है। इस डेम की क्षमता 5 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) है। बारिश में इसके गेट लगाकर इस डेम को भरा जाएगा। इस डैम में एकत्र पानी को 1350 किलोवाट की चार मोटर्स के द्वारा 6.5 किलोमीटर पंपिंग करके सिलारखेड़ी पहुंचाया जाएगा। सिलार खेड़ी तालाब का विस्तार किया गया है। तालाब के आसपास की शासकीय जमीन के अलावा 35 हेक्टेयर निजी जमीन को अधिग्रहित की गई। यहां पर ढाई सौ हेक्टेयर का बैलेंसिंग रिजर्व वायर बना दिया गया है। इस तालाब में 51 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी एकत्रित होगा। इस बैलेंसिंग रिजर्व वायर में 1800 एमटीएफटी पानी एकत्रित किया जा सकेगा। तालाब के आसपास चारों तरफ 6.5 किलोमीटर का मिट्टी की जमीनी सतह से 20 मीटर ऊंची पाल का निर्माण किया है। बारिश में प्रतिदिन 1.45 एमसीएम पानी पंप कर यहां लाया जाएगा। इसे क्षमता 51 एमसीएम तक भर लिया जाएगा। सिलार खेड़ी डेम में एकत्रित किया हुआ 51 एमसीएम (1800 एमसीएफटी) पानी बगैर पंपिंग के 5 किलोमीटर की लंबी पाइप लाइन के जरिए ग्राम कुवारिया गांव के पास शिप्रा नदी में छोड़ दिया जाएगा। ग्राम कुंवारिया किठोदा बैराज की ठीक ऊपर है। यहां से पानी शनि मंदिर, गउघाट होकर रामघाट, मंगलनाथ, सिद्धनाथ तक पहुंच जाएगा। इस तरह सिलारखेड़ी रिजरवायर में एकत्रित पानी 9 महीने तक शिप्रा नदी में धीरे-धीरे करके प्रवाहित किया जा सकेगा।
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