वॉशिंगटन । ईरान और अमेरिका (Iran and the United States) के बीच तनाव के बीच अमेरिकी पत्रकार और टीवी होस्ट टकर कार्लसन (Host Tucker Carlson) के एक दावे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। कार्लसन ने आशंका जताई है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) के दबाव में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन आने वाले दिनों में ईरान पर परमाणु हमला करने का फैसला ले सकता है। हालांकि, अमेरिका की सेना या इजरायल सरकार ने परमाणु हमले की ऐसी किसी योजना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए इस दावे को फिलहाल अपुष्ट माना जाना चाहिए।
कार्लसन के अनुसार, मामले से जुड़े एक जानकार ने दावा किया है कि नेतन्याहू ईरान के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई के लिए ट्रंप पर लगातार दबाव बना रहे हैं। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि अगले सप्ताह, सात नवंबर के आसपास, ट्रंप परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर फैसला ले सकते हैं। दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी रहने की खबरें भी सामने आई हैं।
कार्लसन ने अपने दावे में मध्य ईरान के एक पर्वतीय क्षेत्र का उल्लेख किया है, जहां कथित तौर पर ईरान का परमाणु कार्यक्रम संचालित होने की बात कही जा रही है। उनके अनुसार, इजरायली खुफिया एजेंसियों का दावा है कि इस क्षेत्र में भूमिगत सुरंगें बनाई गई हैं, जिन्हें पारंपरिक हथियारों से नष्ट करना मुश्किल हो सकता है।
कार्लसन का तर्क है कि यदि इन ठिकानों को पारंपरिक हथियारों से नष्ट करना संभव नहीं हुआ, तो परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का विकल्प सामने आ सकता है। हालांकि, इस दावे के समर्थन में कोई स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। अमेरिकी प्रशासन ने भी इस क्षेत्र पर परमाणु हमला करने की किसी योजना की घोषणा नहीं की है।
इजरायली राजनीति से भी जोड़ा मामला
कार्लसन ने ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को इजरायल की घरेलू राजनीति से भी जोड़कर देखा है। उनका दावा है कि हालिया चुनावी घटनाक्रम के बाद नेतन्याहू की राजनीतिक स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई है और सरकार बनाने के लिए उन्हें संसद में बहुमत जुटाने की जरूरत है।
कार्लसन के अनुसार, नेतन्याहू को अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए ट्रंप का समर्थन चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायली प्रधानमंत्री अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ लगातार संपर्क में हैं और ईरान के खिलाफ युद्ध को आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं। हालांकि, नेतन्याहू की राजनीतिक स्थिति और कथित दबाव के बीच सीधे संबंध की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिकी प्रशासन में सैन्य कार्रवाई पर चर्चा
कार्लसन ने दावा किया है कि नेतन्याहू अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के प्रमुख ब्रैड कूपर सहित प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों पर भी दबाव बना रहे हैं। उन्होंने विदेश मंत्री मार्को रूबियो और सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ का भी उल्लेख किया है।
इस बीच, इजरायली अखबार येदियोत अहरोनोत के हवाले से आई रिपोर्टों में कहा गया है कि इजरायली सेना ने ईरान के साथ संभावित नए सैन्य टकराव के लिए अपनी रक्षात्मक और आक्रामक तैयारियां पूरी कर ली हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख ब्रैड कूपर ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष डैन केन की मौजूदगी में ट्रंप के सामने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के विकल्प रखे। हालांकि, सैन्य अभियान दोबारा शुरू करने को लेकर किसी अंतिम निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है। सैन्य कार्रवाई का फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति के स्तर पर होना है।
परमाणु हमले से तीसरे विश्व युद्ध की आशंका जताई
कार्लसन ने अपने दावे में भारत-पाकिस्तान और उत्तर कोरिया-दक्षिण कोरिया का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि यदि अमेरिका ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करता है, तो इससे दुनिया में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की नई मिसाल कायम हो सकती है और अन्य देशों के बीच भी परमाणु संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है।
उन्होंने रूस और यूक्रेन के युद्ध का हवाला देते हुए भी व्यापक संघर्ष की आशंका जताई है। कार्लसन के अनुसार, अमेरिका की ओर से परमाणु हथियारों का इस्तेमाल वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है और तीसरे विश्व युद्ध का खतरा पैदा हो सकता है। हालांकि, ये उनके आकलन और आशंकाएं हैं, किसी संभावित युद्ध की पुष्ट भविष्यवाणी नहीं।
सात नवंबर की तारीख का किया उल्लेख
कार्लसन ने अपने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि ट्रंप सात नवंबर तक परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर निर्णय ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ईरान के साथ समझौते की संभावना के पक्ष में हैं और राष्ट्रपति को कूटनीतिक विकल्पों पर विचार करने की सलाह दे रहे हैं।
फिलहाल, ईरान पर परमाणु हमले की संभावना को लेकर अमेरिकी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में कार्लसन के दावों और संभावित सैन्य विकल्पों से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों के बीच अंतर करना जरूरी है। आने वाले दिनों में अमेरिका की कूटनीतिक और सैन्य रणनीति से इस मामले की दिशा स्पष्ट हो सकती है।
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