
वाशिंगटन. ईरान (Iran) के साथ जंग, बढ़ती महंगाई और आर्थिक नीतियों पर लोगों खासकर युवाओं की नाराजगी के बीच अमेरिका (US) में आज मध्यावधि चुनाव (Midterm elections) होने जा रहे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) भले ही चुनाव मैदान में न हों लेकिन उनकी साख दांव पर हैं। तमाम सर्वेक्षण नीली लहर के संकेत दे रहे हैं, ऐसे में ट्रंप ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों की जीत के लिए आखिरी क्षण तक अपनी पूरी ताकत झोंकी। फिर भी अपनी रिपब्लिकन पार्टी को पिछड़ते देख वीटो कार्ड चल दिया।
अमेरिका इतिहास बनाने की दहलीज पर
मतदान निचले सदन प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 35 यानी सीटों के लिए होना है। सीधे तौर पर कहें तो यह रिपब्लिकन व डेमोक्रेट्स के बीच संसद में वर्चस्व कायम करने की जंग है। मिशिगन में डेमोक्रेट प्रत्याशी अब्दुल अल-सईद को 53%, जबकि रिपब्लिकन माइक रोजर्स को 42% समर्थन मिला है। सईद चुनाव जीतते हैं, तो वह अमेरिकी इतिहास में पहले मुस्लिम सीनेटर बनेंगे।
चुनाव में डेमोक्रेट्स का पलड़ा भारी
प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स के बहुमत (218+सीटें) हासिल करने की संभावना 90 फीसदी के करीब आंकी जा रही है। सीनेट की कई सीटों पर कांटे की टक्कर है। चुनाव से पहले ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 34% से 37% के बीच रह गई। 61% अमेरिकी उनके काम करने के तरीके से असंतुष्ट हैं।
ट्रंप की चेतावनी- जनविरोधी या मनमाने बिल पास नहीं होने देंगे
मध्यावधि चुनाव में मतदान से पहले ट्रंप ने कंसास की एक चुनावी रैली में कहा कि अगर डेमोक्रेट्स बहुमत हासिल कर भी लेते हैं तो वह मिस्टर वीटो बनकर उनके जनविरोधी या मनमाने बिल पास नहीं होने देंगे। ट्रंप ने कहा, लगातार वीटो करने के एक-दो महीने बाद डेमोक्रेट्स समझ जाएंगे और अंततः वार्ता की टेबल पर आकर समझौता करेंगे। बहरहाल, पूरी दुनिया की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि अमेरिकी जनता क्या फैसला सुनाती है। मिस्टर वीटो का मतलब: ट्रंप ने मिस्टर वीटो बनने की बात कहकर यह स्पष्ट कर दिया कि यदि सदन में डेमोक्रेटिक पार्टी की ताकत बढ़ी और उसने कोई बिल पास करके व्हाइट हाउस भेजा, तो वह उनको वीटो लगाकर उसे रोक देंगे।
चुनाव नतीजों से तय होगी वैश्विक कूटनीति की दिशा
सत्ता संतुलन बदलने का सीधा असर अमेरिकी विदेश नीति पर पड़ेगा। अगर डेमोक्रेट्स की ताकत बढ़ी तो कूटनीति, टैरिफ और सैन्य कार्रवाई के राष्ट्रपति के अधिकार पूरी तरह खत्म नहीं होंगे लेकिन प्रशासन पर संसदीय निगरानी, बजटीय दबाव और सियासी चुनौतियां बहुत बढ़ जाएंगी।
ट्रंप की ताकत घटने से भारत पर क्या असर होगा
निचले सदन में डेमोक्रेट्स को बहुमत पर राष्ट्रपति का टैरिफ पर अधिकार बना रहेगा। हालांकि, वित्तीय अनिश्चितता पर थोड़ी रोक लग सकती है। चुनाव चाहे जो जीते, भारत को अपने व्यापारिक लाभ, रक्षा समझौतों और तकनीकी लेन-देन को सुरक्षित रखने के लिए दोनों दलों के नेताओं से अपने रिश्ते और मजबूत करने होंगे।
भारतीय पेशेवरों के लिए नतीजे कितने महत्वपूर्ण?
नतीजे अमेरिका में रह रहे या वहां जाने की उम्मीद रखने वाले भारतीय आईटी पेशेवरों का भविष्य प्रभावित कर सकते हैं। एच-1 बी वीजा नियमों पर भी असर पड़ सकता है। दरअसल, एच-1बी वीजा का सबसे ज्यादा फायदा भारतीय आईटी पेशेवर और टेक कंपनियां उठाती हैं। इससे जुड़े दो बिल लंबित हैं…
एच-1बी मॉडर्नाइजेशन एक्ट में अमेरिकी कर्मचारियों को भर्ती करने की अनिवार्य शर्त से छूट पाने के लिए वेतन का न्यूनतम स्तर बढ़ाने का प्रस्ताव है।
एच-1बी वीजा फ्रॉड क्रैकडाउन एक्ट को अक्तूबर में पेश किया गया जो वीजा नियमों के उल्लंघन पर दंड व जुर्माने को भारी रूप से बढ़ाने की वकालत करता है।
डेमोक्रेट्स जीतते हैं तो संसदीय प्रक्रियाओं के जरिए इन्हें रोक सकते हैं।
सख्त आव्रजन नीतियां रद्द होंगी?
किसी भी सदन में डेमोक्रेट्स जीत से ट्रंप के प्रशासनिक या कार्यकारी आदेशों पर स्वतः रोक नहीं लगेगी। लेकिन डेमोक्रेट्स आव्रजन प्रवर्तन, वीजा नियमों की जांच और ग्रीन कार्ड आवेदनों के निपटारे की प्रक्रिया पर सवाल उठा सकते हैं।
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