श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर (J&K) में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के भीतर जारी घमासान से मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी के सांसद आगा रुहुल्ला मेहदी इस्तीफे के फैसले पर अड़े हैं, जबकि वरिष्ठ नेता मुबारक गुल के रुख पर बुधवार को सबकी निगाहें रहेंगी। पार्टी के 25 विधायकों की नाराजगी और जम्मू संभाग के पांच विधायकों के संभावित इस्तीफे की अटकलों ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। इस बीच भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राम माधव के जम्मू दौरे को भी मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
नेकां नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती असंतुष्ट विधायकों को एकजुट रखना है। पार्टी प्रमुख डॉ. फारूक अब्दुल्ला नाराज विधायकों से संपर्क कर रहे हैं और उनकी शिकायतें दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, यदि असंतोष दूर नहीं हुआ तो पार्टी के भीतर शक्ति संघर्ष और तेज हो सकता है। फिलहाल, उमर सरकार पर संकट की आशंकाओं के बीच किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
25 विधायकों की नाराजगी से बढ़ी चिंता
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 90 निर्वाचित सदस्य हैं। इनमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के 41 विधायक हैं। पार्टी के भीतर असंतुष्ट बताए जा रहे 25 विधायकों ने खुद को असली नेकां बताते हुए नेतृत्व को चेतावनी दी है। राजोरी, पुंछ और रियासी जिलों के पांच अन्य विधायकों के नाम भी इस्तीफे की अटकलों के बीच सामने आए हैं।
यदि असंतुष्ट विधायक एकजुट होकर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ कोई कदम उठाते हैं, तो नेकां के आंतरिक समीकरणों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, केवल नाराजगी या इस्तीफे की अटकलों से सरकार का गिरना तय नहीं है। सरकार की स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि विधायक औपचारिक रूप से क्या फैसला लेते हैं और विधानसभा में संख्या बल की स्थिति क्या बनती है।
श्रीनगर से सांसद आगा रुहुल्ला मेहदी ने अपने इस्तीफे के फैसले से पीछे हटने की संभावना से इनकार किया है। उनके रुख ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि उनके फैसले का पार्टी के दूसरे नेताओं और असंतुष्ट विधायकों पर क्या असर पड़ता है।
रुहुल्ला ने यह भी स्पष्ट किया है कि उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर किसी विधायक को इस्तीफा देने के लिए नहीं कहा है। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में श्रीनगर लोकसभा सीट पर उपचुनाव की स्थिति बनती है तो उस पर विचार किया जाएगा। उनके बयान से संकेत मिलता है कि वह अपने फैसले को व्यक्तिगत राजनीतिक कदम के रूप में देख रहे हैं।
मुबारक गुल के रुख पर बुधवार को नजर
नेकां के वरिष्ठ नेता मुबारक गुल के अगले कदम को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बुधवार को उनकी प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस से पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष की दिशा स्पष्ट हो सकती है। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि नाराज नेताओं और विधायकों को समझाकर विवाद को बढ़ने से रोका जाए।
असंतुष्ट विधायकों ने उमर अब्दुल्ला के सलाहकार नासिर असलम वानी, उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी और शम्मी ओबेरॉय के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इन मांगों को लेकर पार्टी के भीतर बातचीत जारी है।
नेकां के प्रवक्ता इमरान नबी डार ने कहा कि पार्टी हाईकमान विधायकों की आपत्तियों पर गंभीरता से विचार कर रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि मामला जल्द सुलझा लिया जाएगा।
पांच विधायकों के इस्तीफे की अटकलों से हलचल
सोमवार को जम्मू संभाग के राजोरी, पुंछ और रियासी जिलों के पांच विधायकों के संभावित इस्तीफे को लेकर सोशल मीडिया पर संदेश वायरल हुए। इसके बाद पार्टी के भीतर और बाहर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं।
हालांकि, गुलाबगढ़ के विधायक खुर्शीद अहमद और थन्नामंडी के विधायक मुजफ्फर इकबाल ने वायरल पोस्ट को निराधार बताया। दोनों ने कहा कि उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है। ऐसे में इन विधायकों के इस्तीफे की खबरों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
राम माधव के जम्मू दौरे पर सियासी नजरें
नेकां में जारी उठापटक के बीच भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राम माधव मंगलवार को जम्मू में रहेंगे। उनके दौरे को मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। हालांकि, भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने इसे नियमित दौरा बताया है।
राम माधव जम्मू में पार्टी पदाधिकारियों और विधायकों के साथ बैठक कर राजनीतिक हालात पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष से जुड़े कार्यक्रमों की जानकारी भी लेंगे। उनके दौरे में भाजपा की आगामी रणनीति पर विचार किए जाने की संभावना है।
राम माधव इससे पहले जम्मू-कश्मीर में भाजपा और महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के गठबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। कश्मीरी नेताओं के साथ उनके संपर्कों को देखते हुए उनके दौरे पर राजनीतिक हलकों की नजर है। हालांकि, उनके आगमन को नेकां के असंतुष्ट विधायकों से किसी संभावित राजनीतिक समझौते से जोड़ने की अभी पुष्टि नहीं हुई है।
क्या उमर सरकार के सामने वास्तव में संकट है?
नेकां के 41 विधायकों में से यदि बड़ी संख्या में विधायक नेतृत्व से अलग रुख अपनाते हैं, तो पार्टी के सामने गंभीर संगठनात्मक और राजनीतिक चुनौती खड़ी हो सकती है। लेकिन सरकार की स्थिरता का आकलन केवल असंतुष्ट विधायकों की संख्या से नहीं किया जा सकता। इसके लिए उनके औपचारिक फैसले, विधानसभा में समर्थन और संभावित राजनीतिक गठबंधनों की स्थिति देखनी होगी।
फिलहाल, फारूक अब्दुल्ला की सुलह की कोशिशें, आगा रुहुल्ला का इस्तीफे पर अडिग रुख और मुबारक गुल की आगामी घोषणा इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि नेकां नेतृत्व असंतोष को शांत कर पाता है या पार्टी के भीतर जारी टकराव जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नया मोड़ लाता है।
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