
उज्जैन। उज्जैन संभाग की पहचान अब केवल कृषि उत्पादन तक सीमित नहीं रह गई है। सोयाबीन, आलू, मसाले और डेयरी उत्पादों पर आधारित उद्योगों ने इस क्षेत्र को फूड प्रोसेसिंग के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करना शुरू कर दिया है। संभाग में अब तक 7300 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश आया है और इन उद्योगों के माध्यम से 5800 से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। खास बात यह है कि उद्योगों के विस्तार का लाभ केवल नौकरी पाने वाले युवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों, परिवहन, भंडारण और पैकेजिंग से जुड़े कारोबारियों के लिए भी नए अवसर तैयार हो रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि उज्जैन, देवास, मंदसौर, नीमच, रतलाम, शाजापुर और आगर-मालवा में खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित उद्योगों की गतिविधियां बढ़ी हैं। मैकेन, पेप्सिको, एमडीएच और अडानी विल्मर जैसी बड़ी कंपनियों ने यहां निवेश कर उत्पादन शुरू किया है। इन इकाइयों में फ्रेंच फ्राइज, पेय पदार्थ, मसाले, सोया उत्पाद, दाल और खाद्य सामग्री तैयार की जा रही है। इससे स्थानीय स्तर पर कच्चे माल की मांग बढ़ी है और कृषि उपज को उद्योगों तक पहुंचाने का रास्ता खुला है।
बड़ी कंपनियों ने खोले रोजगार के रास्ते…
संभाग में सबसे बड़ा निवेश मैकेन फूड्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने किया है। कंपनी ने 3800 करोड़ रुपए की लागत से फ्रेंच फ्राइज उत्पादन इकाई स्थापित की है, जिसमें 591 लोगों को रोजगार मिला है। पेप्सिको इंडिया ने 1225 करोड़ रुपए के निवेश से फ्लेवर और पेय पदार्थ उत्पादन इकाई शुरू की है। इससे 500 लोगों को काम मिला है। मसाला उद्योग की प्रमुख कंपनी एमडीएच ने 355 करोड़ रुपए का निवेश कर 300 लोगों के लिए रोजगार तैयार किया है। वहीं विप्पी इंडस्ट्रीज ने 210 करोड़ रुपए के निवेश से 750 लोगों को रोजगार दिया है। अमिटेक्स एग्रो प्रोडक्ट में 200 करोड़ रुपए के निवेश से 400 युवाओं को काम मिला है। एआरएफएम फूड्स ने 150 करोड़ रुपए के निवेश से एग्रो फूड पार्क विकसित किया है, जहां 500 लोग कार्यरत हैं। इसके अलावा सफल फूड्स में 300, सोनिक बायोकेम में 407, अडानी विल्मर में 350, एवीआई एग्री बिजनेस में 341 और इस्कॉन बालाजी फूड में 383 लोगों को रोजगार मिला है। अन्य इकाइयों में भी सैकड़ों लोगों को काम मिला है। इन उद्योगों में उत्पादन, तकनीकी संचालन, गुणवत्ता जांच, पैकेजिंग और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बने हैं।
किसानों को खेत से बाजार तक मिल रहा फायदा…
फूड प्रोसेसिंग उद्योगों का एक बड़ा लाभ यह है कि अब कृषि उपज के लिए स्थानीय स्तर पर ही खरीदार उपलब्ध हो रहे हैं। कंपनियों को उत्पादन के लिए सोयाबीन, आलू, मसाले और अन्य कृषि उत्पादों की जरूरत होती है। ऐसे में किसानों की उपज को नजदीकी औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ी हैं। इससे परिवहन खर्च और बाजार तक पहुंचने की परेशानी कम हो सकती है। स्थानीय खरीद बढऩे से किसानों को उपज के बेहतर दाम मिलने का अवसर भी मिल रहा है। उद्योगों की जरूरत के अनुसार भंडारण, कोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउसिंग का महत्व भी बढ़ रहा है। इसके साथ ही ट्रांसपोर्ट, पैकेजिंग, लोडिंग-अनलोडिंग और कृषि उपज की छंटाई जैसे कामों में भी रोजगार के अवसर बन रहे हैं। इस तरह उद्योगों का लाभ सीधे नौकरी पाने वालों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे कारोबारियों और कृषि से जुड़े परिवारों तक पहुंचने की संभावना है। एमपीआईडीसी के कार्यकारी संचालक राजेश राठौड़ के अनुसार, उज्जैन संभाग में खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों का विस्तार तेजी से हो रहा है। कृषि उत्पादन और औद्योगिक इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल से आने वाले समय में रोजगार के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved