
- लोडिंग वाहनों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में बैठ रहे मजदूर-आरटीओ की अनदेखी से हादसों का खतरा
उज्जैन। शहर और आसपास के क्षेत्रों में यातायात नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। लोडिंग वाहनों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सामान की जगह बच्चों, महिलाओं और मजदूरों को बैठाकर सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है। इन वाहनों में न तो यात्रियों की सुरक्षा का कोई इंतजाम होता है और न ही बैठने की उचित व्यवस्था। इसके बावजूद सड़कों पर ऐसे वाहन बेखौफ दौड़ रहे हैं। कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन परिवहन विभाग और आरटीओ की ओर से प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
लोडिंग वाहन और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां मूल रूप से सामान ढोने के लिए बनाए गए हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। मजदूरों को काम पर ले जाने के लिए ट्रॉलियों में भरकर ले जाया जाता है। कई बार महिलाओं और बच्चों को भी इन्हीं वाहनों में बैठा दिया जाता है। तेज रफ्तार, अचानक ब्रेक लगने या वाहन के असंतुलित होने की स्थिति में इनमें बैठे लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि इन वाहनों में बैठे लोगों के नीचे गिरने का खतरा भी बना रहता है। सड़क पर अचानक कोई वाहन सामने आने या चालक के नियंत्रण खोने पर गंभीर दुर्घटना हो सकती है। इसके बावजूद शहर की सड़कों और प्रमुख मार्गों पर ऐसे वाहन आसानी से देखे जा सकते हैं। सवाल यह है कि जब यातायात पुलिस और परिवहन विभाग की नजरों के सामने नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदार विभागों की नींद खुलेगी? जरूरत है कि आरटीओ और यातायात पुलिस संयुक्त अभियान चलाकर ऐसे वाहनों पर कार्रवाई करें। साथ ही मजदूरों को सुरक्षित तरीके से लाने-ले जाने की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए, ताकि किसी की जान जोखिम में डालकर परिवहन न किया जा सके।