
जबलपुर। नगर निगम में कथित तौर पर दो अलग-अलग जन्मतिथियों के दस्तावेजों के आधार पर नौकरी करने के आरोपों से घिरे पंप ऑपरेटर अमित मेहरा के खिलाफ निगम प्रशासन ने प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए उनका तबादला कर दिया है। कार्यपालन यंत्री (जल) के आदेश के अनुसार अमित मेहरा को वर्तमान पदस्थापना से हटाकर भोंगाद्वार जलशोधन संयंत्र में पदस्थ किया गया है। वहीं, पूरे मामले में विभागीय जांच की तैयारी भी शुरू होने की जानकारी सामने आई है। पूरा मामला उस शिकायत के बाद सामने आया, जो शिकायतकर्ता टीटू यादव ने नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव को सौंपी है।
फर्जी दस्तावेजों से नौकरी पाने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विरोधाभासी दस्तावेजों और कथित फर्जी अंकसूचियों के आधार पर सरकारी सेवा प्राप्त की गई तथा बाद में भी इन्हीं दस्तावेजों के सहारे सेवा जारी रखी गई। साथ ही शैक्षणिक योग्यताओं में भी अनियमितता का आरोप लगाया गया है।हालांकि, इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही जांच पूरी हुई है। ऐसे में इन आरोपों की सत्यता विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
निगम परिसर में अवैध कार्यालय चलाने के आरोप
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अमित मेहरा नगर निगम परिसर में कथित रूप से एक अनाधिकृत कार्यालय संचालित कर रहे थे, जहां से विभिन्न प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप किया जाता था। शिकायतकर्ता का दावा है कि अधिकारियों पर दबाव बनाकर फाइलें रुकवाई या आगे बढ़वाई जाती थीं। प्रमोशन, जीपीएफ एरियर और अन्य लंबित भुगतान से जुड़ी फाइलों में कथित हस्तक्षेप किया जाता था। आउटसोर्स एजेंसियों एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों से कमीशन वसूली के आरोप भी लगाए गए हैं।इन सभी आरोपों की भी जांच की मांग की गई है।
तबादले को माना जा रहा पहला प्रशासनिक कदम
नगर निगम सूत्रों के अनुसार, अमित मेहरा का तबादला प्रशासन द्वारा उठाया गया पहला कदम माना जा रहा है। अब विभागीय जांच में दस्तावेजों का सत्यापन, सेवा पुस्तिका, शैक्षणिक अभिलेख तथा अन्य रिकॉर्ड की पड़ताल की जाएगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित सेवा नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
जांच पर टिकी निगाहें
यह मामला नगर निगम की कार्यप्रणाली और सेवा अभिलेखों की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की नजर विभागीय जांच पर है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और जिम्मेदारी किस स्तर तक तय होती है।
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