
- महाकाल लोक के अंडरग्राउंड कॉरिडोर को अप्रैल तक पूरा करने का लक्ष्य
उज्जैन। महाकाल मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को हरिफाटक से सीधे महाकाल लोक तक पहुँचाने के अंडरग्राउंड कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। इसे अप्रैल 27 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस काम रेलवे ट्रैक के नीचे निर्माण सबसे बड़ी चुनौती होगी।
सिंहस्थ 2028 में करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुँचने का अनुमान है। ऐसे में शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारू रखना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है। हाल ही में सावन सोमवार पर करीब साढ़े सात लाख श्रद्धालु उज्जैन पहुँचे थे। इस दौरान इंदौर-उज्जैन हाईवे से हरिफाटक तक यातायात का दबाव बढ़ गया और कई स्थानों पर घंटों जाम की स्थिति बनी थी। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए हरिफाटक पार्किंग से महाकाल लोक तक भूमिगत कॉरिडोर बनाया जा रहा है। करीब 650 मीटर लंबे इस अंडरपास को 91.74 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति वाले प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है। फिलहाल करीब 15 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। योजना के तहत श्रद्धालु हरिफाटक क्षेत्र में वाहन पार्क करने के बाद भूमिगत रास्ते से सीधे महाकाल लोक तक पहुँच सकेंगे। दर्शन के बाद वापसी के लिए भी इसी कॉरिडोर का उपयोग किया जा सकेगा। इससे श्रद्धालुओं को मुख्य सड़क के यातायात से गुजरने की जरूरत कम होगी और हरिफाटक ब्रिज पर वाहनों तथा पैदल श्रद्धालुओं का दबाव घटाने में मदद मिलेगी। प्रस्तावित टनल सामान्य अंडरपास से अलग होगी। इसकी कुल लंबाई करीब 650 मीटर होगी, जिसमें लगभग 450 मीटर हिस्सा जमीन से करीब 10 मीटर नीचे बनाया जाएगा। कॉरिडोर में दो अलग-अलग बॉक्स होंगे और प्रत्येक की चौड़ाई करीब 9 मीटर रहेगी। एक बॉक्स से श्रद्धालु महाकाल लोक की ओर जाएंगे, जबकि दूसरे से वापसी होगी। दोनों दिशाओं का आवागमन अलग रहने से भीड़ प्रबंधन आसान होगा। जरूरत पडऩे पर बड़े वाहन भी इन बॉक्स से गुजर सकेंगे। डिजाइन में बैरिकेडिंग की जरूरत कम रखने का भी ध्यान रखा गया है। प्रोजेक्ट की कार्यावधि 15 महीने निर्धारित की गई है और अनुबंध के अनुसार इसे अप्रैल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। हरिफाटक पार्किंग क्षेत्र से काम शुरू हो चुका है। निर्माण के आगे बढऩे के साथ चुनौती भी बढ़ेगी। प्रोजेक्ट क्षेत्र में एक थाना, स्कूल और कुछ अन्य भवन आ रहे हैं। इनके हटाने के साथ उपयोगिताओं को दूसरी जगह शिफ्ट करने और भू-अर्जन से जुड़े काम भी निर्माण की गति को प्रभावित कर सकते हैं। टनल का महत्वपूर्ण हिस्सा रेलवे लाइन के नीचे से गुजरेगा। रेलवे ट्रैक के नीचे अंडरपास का निर्माण रेलवे स्वयं करेगा। इसके लिए राज्य शासन की ओर से रेलवे को 31 करोड़ रुपये दिए गए हैं। शासन ने 28 अक्टूबर 2025 को प्रोजेक्ट के लिए 91.74 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी थी।