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बांग्लादेश में फिर लगे भारत विरोधी नारे, तारिक रहमान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन

October 31, 2026

नई दिल्ली: बांग्लादेश (Bangladesh) में प्रधानमंत्री तारिक रहमान (Prime Minister Tariq Rahman) की सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान एक बार फिर भारत विरोधी नारे लगाए गए. राजधानी ढाका में शुक्रवार को नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के नेता नाहिद इस्लाम ने बड़ी रैली की. इसमें हजारों लोग शामिल हुए. प्रदर्शन में महंगाई, बिजली संकट और ईंधन-गैस की कमी को लेकर सरकार को घेरा गया. साथ ही गृह मंत्री और ऊर्जा मंत्री के इस्तीफे की मांग की गई.

ढाका के नेशनल म्यूजियम के सामने हुई इस रैली में भारत विरोधी नारे लगाए गए. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में NCP के नेता ‘दिल्ली नहीं, ढाका’ का नारा लगाते दिखे. इसके जवाब में भीड़ ने ‘ढाका, ढाका’ के नारे लगाए. मालूम हो, नाहिद इस्लाम 2024 के जुलाई विद्रोह के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं. इस आंदोलन के बाद शेख हसीना की सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी.

रैली को संबोधित करते हुए नाहिद इस्लाम ने भारत पर बांग्लादेश के खिलाफ साजिश करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार बांग्लादेश को भारत की साजिशों से नहीं बचा पाएगी. उन्होंने सीमा पर लोगों की हत्या, असम और पश्चिम बंगाल में मुसलमानों के साथ भेदभाव और दिल्ली में मस्जिदों को गिराने की योजना होने जैसे दावे भी किए.

नाहिद ने गंगा जल समझौते का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि अगर भारत के साथ इस समझौते पर निष्पक्ष तरीके से दोबारा बातचीत नहीं हुई तो बांग्लादेश के लोग फिर सड़कों पर उतरेंगे. इस बार अपने हक के पानी को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा. दरअसल, भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे को लेकर 30 साल का समझौता हुआ था. यह समझौता दिसंबर 2026 में खत्म हो रहा है. इसके तहत जनवरी से मई के बीच पश्चिम बंगाल के फरक्का बैराज पर गंगा के पानी का बंटवारा होता है.


  • बांग्लादेश में गंगा को पद्मा नदी के नाम से जाना जाता है. वहां बड़ी आबादी की आजीविका इस नदी और इससे जुड़े जल तंत्र पर निर्भर है. इसी वजह से दोनों देशों के बीच इस समझौते को अहम माना जाता है. बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री भी दिसंबर तक नए समझौते को अंतिम रूप देने की मांग कर चुके हैं. इस रैली में NCP सांसद हसनत अब्दुल्ला भी शामिल हुए. उन्होंने पिछले साल भारत के पूर्वोत्तर के सात राज्यों को अलग-थलग करने की धमकी दी थी. उन्होंने सिलीगुड़ी कॉरिडोर का भी जिक्र किया था. यह कॉरिडोर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है.

    बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद भारत विरोधी बयानबाजी बढ़ी थी. अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल में भी कई नेताओं और छात्र संगठनों के सदस्यों ने भारत के खिलाफ बयान दिए थे. NCP नेताओं ने चुनाव से पहले भी भारत के हस्तक्षेप के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन करने की अपील की थी.

    बिजली संकट और महंगाई से सरकार के खिलाफ नाराजगी
    मालूम हो, बांग्लादेश में पिछले कुछ महीनों से बिजली और गैस की कमी की समस्या बनी हुई है. मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है. बांग्लादेश अपनी जरूरत का 90 फीसदी से ज्यादा तेल और करीब 30 फीसदी गैस आयात करता है. बिजली कटौती का असर वहां के कपड़ा उद्योग पर भी पड़ा है. इसके साथ ही महंगाई ने लोगों की मुश्किलें बढ़ाई हैं. विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में महंगाई करीब 8.5 फीसदी रही है. खाने-पीने और दूसरी जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ी हैं, जबकि मजदूरों की कमाई उसी रफ्तार से नहीं बढ़ी. विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल के मुकाबले करीब 21 लाख और लोग गरीबी में चले गए हैं.

    NCP ने गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद और ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद टुकू के इस्तीफे की मांग की है. नाहिद इस्लाम ने कहा कि दोनों मंत्री अपने काम में नाकाम रहे हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मंत्रियों ने इस्तीफा नहीं दिया तो देशभर में प्रदर्शन किए जाएंगे. इन प्रदर्शनों के जरिए प्रधानमंत्री तारिक रहमान के आवास का घेराव भी किया जाएगा. NCP सांसद अख्तर हुसैन ने गैस की कीमतों का मुद्दा उठाया. उन्होंने दावा किया कि कोलकाता में LPG सिलेंडर करीब 1,000 टका में मिलता है, जबकि बांग्लादेश में इसकी कीमत दोगुने से ज्यादा है. उन्होंने ऊर्जा मंत्री से इस अंतर पर जवाब मांगा.

    हसीना के सत्ता से हटने के बाद फिर बढ़ी भारत विरोधी बयानबाजी
    नाहिद इस्लाम ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान पर भी निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि तारिक रहमान लंदन से बांग्लादेश लौटने के बाद भ्रष्टाचार, वसूली और हिंसा को बढ़ावा देने की योजना के साथ आए हैं. उन्होंने तारिक रहमान को नया तानाशाह बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी पुराने और नए, दोनों तानाशाहों के खिलाफ लड़ेगी.

    फरवरी में तारिक रहमान के नेतृत्व में BNP की सरकार बनने के बाद भारत विरोधी बयानबाजी में कुछ कमी आई थी. लेकिन अब घरेलू मुद्दों पर सरकार के खिलाफ बढ़ते गुस्से के बीच भारत विरोधी नारे फिर सुनाई दिए हैं. शुक्रवार की रैली का मुख्य मुद्दा बिजली संकट, महंगाई और मंत्रियों की जवाबदेही था. हालांकि, इसमें भारत के खिलाफ लगाए गए नारों और बयानों ने दोनों देशों के संबंधों को लेकर फिर सवाल खड़े किए हैं.

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