
वाशिंगटन. इलेक्ट्रॉनिक्स (Electronics) और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री (Minister of Information Technology) अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) इन दिनों अमेरिका (US) में है, जहां उन्होंने वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट की ओर से आयोजित एक अहम बैठक में हिस्सा लिया। यह बैठक क्रिटिकल मिनरल्स संबंधी एक महत्वपूर्ण मीटिंग थी। मीटिंग के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि किन-किन मुद्दों पर चर्चा की गई। वाशिंगटन में आयोजित इस बैठक में महत्वपूर्ण खनिजों पर चर्चा करने के लिए जी-7 देशों के वित्त मंत्री शामिल हुए।
अश्विनी वैष्णव ने बताया बैठक के मुद्दे
बैठक की जानकारी देते हुए मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कुछ देशों के मंत्रियों को महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला को कैसे लचीला बनाएं, कैसे अच्छी गुणवत्ता के खनिज सबको मिले उस पर एक बैठक बुलाई थी। कई देशों ने अपने अनुभवों को साझा किया। आपूर्ति श्रृंखला को लचीला बनाने के लिए वे लोग क्या कदम उठा रहे हैं और प्रकृति के नजरिए से महत्वपूर्ण खनिजों को रीसायकल करके ज्यादा इस्तेमाल में लिया जा सके, गुणवत्ता पर कैसे फोकस हो सहित कई विषयों पर चर्चा हुई।
उन्होंने बताया कि बैठक सकारात्मक रही। अपने बयान में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में विनिर्माण क्षेत्र विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण तेजी से बढ़ रहा है, तो भारत सहित सभी देशों के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला का होना बहुत जरूरी है। इस बैठक में विभिन्न देशों के प्रतिभागियों ने अपने अनुभवों, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने के लिए उठाए जा रहे कदमों, विशेष रूप से खनिज अयस्कों के शोधन और प्रसंस्करण की तकनीक पर चर्चा की, ताकि उच्च गुणवत्ता वाले महत्वपूर्ण खनिज, विशेष रूप से दुर्लभ पृथ्वी धातुएं और स्थायी चुंबक, दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ तरीके से सुरक्षित किए जा सकें।
कई देशों के बीच प्रौद्योगिकी साझाकरण पर चर्चा
अश्विनी वैष्णव ने आगे बताया कि नए परियोजनाओं के वित्तपोषण पर चर्चा हुई। विभिन्न देशों के बीच प्रौद्योगिकी साझाकरण पर चर्चा हुई। पुनर्चक्रण पर बहुत महत्वपूर्ण चर्चा हुई क्योंकि यह अपशिष्ट उत्पादों से खनिजों का दोहन करने का एक अच्छा तरीका है। विभिन्न देशों के बीच अनुसंधान कार्य साझा करने पर चर्चा और समझौते हुए। यह एक बहुत ही सकारात्मक बैठक थी, जिसमें महत्वपूर्ण खनिजों की गुणवत्ता और उपलब्धता में सुधार लाने पर जोर दिया गया।
केंद्र का राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन
बता दें कि केंद्र सरकार ने 2025 में 16,300 करोड़ रुपये के व्यय के साथ राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (एनसीएमएम) को मंजूरी दी थी। राज्य उद्यमों और निजी कंपनियों द्वारा 18,000 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद है, जिससे 2024 से 2031 के बीच कुल नियोजित निवेश लगभग 34,300 करोड़ रुपये हो जाएगा। एनसीएमएम की शुरुआत महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए एक मजबूत ढांचा स्थापित करने के उद्देश्य से की गई थी।
दुर्लभ खनिज सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
बेसेंट ने महत्वपूर्ण खनिजों पर चर्चा करने के लिए जी-7 देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक की वाशिंगटन में मेजबानी की। जी-7 में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका के साथ-साथ यूरोपीय संघ शामिल हैं। भारत-ऑस्ट्रेलिया समेत अन्य देशों को भी इस बैठक में आमंत्रित किया गया है। बैठक को लेकर वैष्णव ने कहा था कि महत्वपूर्ण और दुर्लभ खनिजों को सुरक्षित करना ट्रंप प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved