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Bangladesh: हसीना सरकार गिरने से पहले ही शुरू हो गई थी यूनुस को सत्ता सौंपने की तैयारी? AFP पत्रकार की भूमिका पर बड़ा दावा

October 30, 2026

नई दिल्ली। बांग्लादेश (Bangladesh) में अगस्त 2024 में हुए सत्ता परिवर्तन को लेकर एक नया दावा सामने आया है। इसके मुताबिक, तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना (Sheikh Hasina) के पद छोड़ने और देश से बाहर जाने से पहले ही मोहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) को अंतरिम सरकार की कमान सौंपने की तैयारी शुरू हो गई थी। इस प्रक्रिया में समाचार एजेंसी AFP के एक पत्रकार ने कथित तौर पर छात्र आंदोलन के नेताओं और यूनुस के बीच संपर्क सूत्र की भूमिका निभाई थी।

यह दावा यूनुस के पूर्व प्रेस सचिव और AFP के पूर्व पत्रकार शफीकुल आलम ने किया है। उनके मुताबिक, आंदोलन के दौरान छात्र नेता यूनुस तक अपनी बात पहुंचाना चाहते थे। ऐसे में AFP की फैक्ट-चेक टीम के संपादक कदरुद्दीन शिशिर ने दोनों पक्षों के बीच शुरुआती बातचीत कराने में मदद की। आलम के इस बयान ने बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के घटनाक्रम और उसके पीछे की रणनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

AFP के ढाका कार्यालय से संचालित हुई गोपनीय बातचीत
शफीकुल आलम ने फेसबुक पोस्ट में बताया कि अगस्त 2024 में जब हसीना विरोधी आंदोलन चरम पर था, तब छात्र नेताओं को ऐसे व्यक्ति की तलाश थी, जो मोहम्मद यूनुस तक उनका संदेश पहुंचा सके। आलम के अनुसार, कदरुद्दीन शिशिर ने छात्र नेताओं की ओर से सबसे पहले यूनुस से संपर्क किया और दोनों पक्षों के बीच बातचीत की शुरुआत कराई।

आलम ने लिखा कि शिशिर ढाका स्थित AFP कार्यालय में उनके बेहद करीब बैठते थे। उन्होंने इस संवेदनशील काम को पूरी गोपनीयता के साथ अंजाम दिया। उस समय शेख हसीना सरकार का खुफिया तंत्र सक्रिय था और सरकार को इस संपर्क की जानकारी मिलना पत्रकारों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता था।

आलम के मुताबिक, यदि इस बातचीत की भनक सरकार को लग जाती तो शिशिर और AFP की पूरी टीम को कथित तौर पर ‘आइनाघर’ पहुंचा दिया जाता। बांग्लादेश में ‘आइनाघर’ नाम उस कथित गुप्त हिरासत केंद्र के लिए इस्तेमाल होता रहा है, जहां हसीना शासन के दौरान राजनीतिक विरोधियों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखने, प्रताड़ित करने और उनकी हत्या किए जाने के आरोप लगते रहे हैं।

आलम ने यह भी दावा किया कि शिशिर ने इस दौरान बेहद शांत रहते हुए सरकार की कथित ज्यादतियों के वीडियो सबूत जुटाने शुरू कर दिए थे। बांग्लादेश संवाद संस्था के अनुसार, शेख हसीना के देश छोड़ने की खबर सबसे पहले देने के लिए शफीकुल आलम को जून 2025 में सोसाइटी ऑफ पब्लिशर्स इन एशिया (SOPA) अवॉर्ड भी मिला था।


  • AFP ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि इंटरनेट बंद किए जाने के दौरान उसका ढाका ब्यूरो उन चुनिंदा स्थानों में शामिल था, जहां से बाहरी दुनिया से संपर्क बना रहा और जरूरी खबरें भेजी जा सकीं। अब आलम के खुलासे के बाद इस संचार व्यवस्था के इस्तेमाल को लेकर भी चर्चा हो रही है।

    हसीना के देश छोड़ने से पहले ही शुरू हो गई थी यूनुस की भूमिका?
    शफीकुल आलम के दावे से सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार की कमान सौंपने की तैयारी शेख हसीना के देश छोड़ने से पहले ही शुरू हो गई थी?

    बांग्लादेश में जुलाई-अगस्त 2024 के विरोध प्रदर्शन की शुरुआत सरकारी नौकरियों में आरक्षण के खिलाफ छात्र आंदोलन के रूप में हुई थी। धीरे-धीरे यह आंदोलन तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के खिलाफ व्यापक जनविरोध में बदल गया।

    5 अगस्त 2024 को हिंसक प्रदर्शनों के बीच हसीना को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा। वह हेलीकॉप्टर और फिर विमान से भारत के हिंडन एयरबेस पहुंचीं। इसके अगले दिन, 6 अगस्त को छात्र आंदोलन के नेताओं ने सार्वजनिक रूप से मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार बनाने का प्रस्ताव रखा। इस घोषणा में नाहिद इस्लाम और आसिफ महमूद जैसे छात्र नेता शामिल थे, जिन्हें बाद में यूनुस सरकार में सलाहकार की जिम्मेदारी मिली।

    इसके दो दिन बाद, 8 अगस्त 2024 को यूनुस पेरिस से ढाका पहुंचे और अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में शपथ ली। शफीकुल आलम के ताजा बयान के मुताबिक, छात्र नेताओं और यूनुस के बीच संपर्क की प्रक्रिया हसीना के देश छोड़ने से पहले ही शुरू हो गई थी।

    हालांकि, इस दावे से अपने आप यह साबित नहीं होता कि पूरे आंदोलन या सत्ता परिवर्तन की योजना पहले से तैयार कर ली गई थी। फिलहाल यह आलम का बयान है, जिसके आधार पर घटनाक्रम को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    आंदोलन की योजना को लेकर यूनुस का पुराना बयान भी चर्चा में
    इस पूरे मामले के बीच सितंबर 2024 में न्यूयॉर्क के एक कार्यक्रम में मोहम्मद यूनुस की ओर से दिया गया बयान भी फिर चर्चा में है। उस दौरान उन्होंने अपने विशेष सहायक महफूज आलम को ‘पूरी क्रांति के पीछे का दिमाग’ बताया था।

    जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन का जिक्र करते हुए यूनुस ने कहा था कि यह अचानक हुआ घटनाक्रम नहीं था, बल्कि इसे व्यवस्थित तरीके से तैयार किया गया था। उन्होंने यह भी बताया था कि आंदोलन का नेतृत्व इस तरह तैयार किया गया था कि यदि कोई नेता गिरफ्तार भी हो जाता, तब भी आंदोलन को रोका नहीं जा सकता था।

    यूनुस के इस पुराने बयान और शफीकुल आलम के ताजा दावे को साथ रखकर बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन की पृष्ठभूमि और आंदोलन की रणनीति को लेकर नए सवाल उठ रहे हैं।

    हसीना की वापसी के बयान के बीच नया घटनाक्रम
    शफीकुल आलम का यह पोस्ट ऐसे समय सामने आया है, जब शेख हसीना ने भारत में निर्वासन के दौरान बांग्लादेश लौटने की बात दोहराई है। 19 अक्टूबर को एक ऑनलाइन कार्यक्रम में उन्होंने दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की बात कही थी। हसीना ने यह भी कहा था कि उन्हें गिरफ्तारी, प्रताड़ना या जान से मारे जाने का डर नहीं है।

    इसी बीच 28 अक्टूबर को ढाका में बांग्लादेश वायुसेना के एक पूर्व अधिकारी का शव नदी में मिला। रिपोर्टों के मुताबिक, उनका संबंध उस वीडियो से बताया जा रहा है, जिसमें हसीना को 5 अगस्त 2024 को देश छोड़ते हुए दिखाया गया था।

    मृतक की पहचान 28 वर्षीय फ्लाइट लेफ्टिनेंट के. एम. तहसीफ सौरी के रूप में की गई है। उन्हें अगस्त 2024 में ही सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। उनके परिवार ने हत्या का आरोप लगाया है। हालांकि, उनकी मौत के कारणों और हसीना के देश छोड़ने वाले वीडियो से उनके कथित संबंध की स्वतंत्र पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है।

    यूनुस का कार्यकाल खत्म, बांग्लादेश में नई सरकार
    मोहम्मद यूनुस ने 16 फरवरी 2026 को अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार का पद छोड़ दिया। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के तारिक रहमान के प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद देश में नई सरकार का गठन हुआ।

    यूनुस के कार्यकाल के दौरान हसीना विरोधी आंदोलन से जुड़े कई छात्र नेताओं को अंतरिम सरकार में जगह मिली थी। बाद में इनमें से कुछ नेताओं ने नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) का गठन किया। इस पार्टी ने चुनाव में जमात गठबंधन के साथ मिलकर हिस्सा लिया।

    शफीकुल आलम के ताजा दावे ने अब एक बार फिर अगस्त 2024 के सत्ता परिवर्तन से जुड़े घटनाक्रम को चर्चा में ला दिया है। हालांकि, छात्र नेताओं और यूनुस के बीच हसीना के देश छोड़ने से पहले संपर्क होने का दावा और पूरे आंदोलन की पूर्व नियोजित साजिश होने का निष्कर्ष—दो अलग-अलग बातें हैं। इनके बीच संबंध स्थापित करने के लिए स्वतंत्र और पुष्ट साक्ष्यों की जरूरत होगी।

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