
नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह (Naseeruddin Shah) के एक वीडियो में खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताने और केंद्र सरकार (Central Government) पर सवाल उठाने के बाद राजनीतिक विवाद (Political Controversy) सामने आया है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने अभिनेता के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उनकी सोच को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया। वहीं, महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नीतीश राणे (Nitesh Rane) ने भी शाह पर निशाना साधते हुए उन पर पाकिस्तान (Pakistan) के पक्ष में बोलने का आरोप लगाया। यह विवाद पश्चिम बंगाल स्थित सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (Satyajit Ray Film and Television Institute) (एसआरएफटीआई) के छात्रों से जुड़े मुद्दे पर अभिनेता की टिप्पणी के बाद बढ़ा है।
किरेन रिजिजू ने शाह का वीडियो साझा करते हुए कहा कि वह पहले अभिनेता का सम्मान करते थे, लेकिन उनके इस बयान से उन्हें निराशा हुई। उन्होंने शाह को ‘खतरनाक दिमागी नक्सल’ बताते हुए कहा कि इस तरह की सोच भारत के लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक है। वीडियो में शाह कहते सुनाई देते हैं कि वह गर्व के साथ खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कहते हैं। अभिनेता ने यह टिप्पणी सरकार की नीतियों और छात्रों के साथ हो रही कथित कार्रवाई के विरोध में की थी।
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नीतीश राणे ने भी शाह के बयान की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि अभिनेता पाकिस्तान की स्क्रिप्ट पढ़ रहे हैं और इसके लिए उन्हें भुगतान किया जाता है। राणे ने शाह के फिल्मी करियर को लेकर भी टिप्पणी की। ये आरोप राणे की ओर से लगाए गए हैं; इनके समर्थन में कोई प्रमाण संबंधित विवरण में प्रस्तुत नहीं किया गया है।
अपने वीडियो में नसीरुद्दीन शाह ने सरकार को संबोधित करते हुए शिक्षा संस्थानों, युवाओं की अभिव्यक्ति और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि सरकार के आलोचकों को राष्ट्रविरोधी और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ जैसे नाम दिए जाते हैं। शाह ने आरोप लगाया कि देश में लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों के लिए सरकार को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि देश में कोई ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ है, तो उनके विचार में वह मौजूदा सरकार है।
अभिनेता ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान और जामिया मिल्लिया इस्लामिया का उल्लेख करते हुए छात्रों के खिलाफ कथित कार्रवाई पर आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल किया कि युवाओं के हौसले तोड़ने, शैक्षणिक संस्थानों को प्रभावित करने और लोकतंत्र को खतरे में डालने की कोशिशें कब तक जारी रहेंगी। शाह ने कहा कि छात्रों के साथ हुए व्यवहार को याद रखा जाएगा।
इस विवाद की पृष्ठभूमि में 24 अक्टूबर को जारी शाह का वह वीडियो भी है, जिसमें उन्होंने एसआरएफटीआई के छात्रों और भविष्य के फिल्म निर्माताओं से जुड़े घटनाक्रम पर चिंता जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल चुनाव में जीत के बाद भाजपा उन लोगों से बदला लेने की कोशिश कर रही है, जो उसकी विचारधारा और नीतियों से सहमत नहीं हैं। यह शाह का राजनीतिक आकलन था।
शाह के अनुसार, संस्थान के छात्रों से प्रशासनिक जवाबदेही की मांग करने के बजाय उन्हें कारण बताओ नोटिस दिए गए, निगरानी में रखा गया, धमकियां दी गईं और छात्रावास खाली करने के लिए कहा गया। उन्होंने आशंका जताई कि इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य युवाओं को डराना या उनका विचार बदलने के लिए दबाव बनाना हो सकता है। अभिनेता ने कहा कि भविष्य के फिल्म निर्माता देश और समाज की वास्तविक स्थिति को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इस तरह एसआरएफटीआई के छात्रों का मुद्दा अब राजनीतिक बयानबाजी का विषय बन गया है। एक ओर शाह ने छात्रों के अधिकारों और लोकतंत्र को लेकर सरकार की आलोचना की है, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और मंत्री नीतीश राणे ने उनके बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
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