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भोपाल: जहां अपने ही मुंह मोड़ रहे वहां ये दो सच्चे योद्धा कर रहे पूरी सेवा भावना से अंतिम संस्कार 

भोपाल। कोरोना का यह ऐसा संकट काल (Crisis time) है जहां अपने ही मुंह मोड़ रहे हैं, कई ऐसे लोग भी हैं, जिनकी कोरोना से मौत होने पर उनके परिजन भी अंतिम संस्‍कार के लिए नहीं आ रहे हैं। ऐसे में तपती दोपहरी, सिर पर चिलचिलाता सूरज, श्मशान में धधकती चिताओं से निकलती लपटें, इधर पीपीई किट (PPE Kit) के अंदर पसीने से तरबतर फिर भी अनजाने, बेगाने कोरोना मृतकों के शवों को हाथों से उठाकर कभी चिताओं में जलाना, कभी कब्रिस्तान में सुपुर्दे खाक करना तो कभी केफीन में पैक कराकर दफनाना। आज यहां बीते दो महीनों में करीब 400 लोगों को मुक्ति का मार्ग दिखा चुके नगर निगम के इन दो कोरोना योद्धाओं को हर कोई सैल्यूट कर रहा है।  
दरअसल, नगर निगम सागर में ये दो सच्चे योद्धा कुलदीप बाल्मीकि और पहलाद रैकवार विगत कई माह से पूरी धार्मिक रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार करने में लगे हुए हैं। 
कुलदीप बाल्मीकि और पहलाद रैकवार अपने इस पुण्‍य कार्य को लेकर कहते हैं कि हम लोग प्रातः नौ बजे आने के बाद से देर शाम तक कोरोना संक्रमित व्यक्तियों के निधन के पश्चात आने वाले शवों का उनके धर्म के रीति-रिवाज के अनुसार अपनत्व का भाव रखते हुए दाह संस्कार कर रहे हैं। उन्‍होंने बताया कि कोई भी कोरोना संक्रमित व्यक्ति चाहे हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई की मृत्यु हो, तत्काल पश्चात उन्हें मेडिकल कॉलेज की मर्चुरी एवं जो कोरोना संक्रमित व्यक्ति की यदि घर पर ही मौत होती है तो उनको घर से ले जाकर पूरी रीति-रिवाज एवं अपनत्व की भावना लेकर 42 डिग्री तापमान, झुलसाने वाली गर्मी में पीपीई किट पहनकर अंतिम संस्कार में हम लोग जुट जाते हैं । 
यहां सागर नगर निगम के अधीन नरयावली नाका मुक्तिधाम, कब्रिस्तान और क्रिश्चियन कब्रिस्तान में कोरोना मृतकों के उनके धार्मिक रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार, क्रियाकर्म कराया जा रहा है। बीएमसी और निगम से मिली जानकारी अनुसार बीते दो महीनों में ही कोरोना पॉजिटिव, कोरोना संदिग्धों में कई सैकड़ों का अंतिम संस्कार कराया जा चुका है। इसमें आये दिन दो दर्जन के आसपास अंतिम संस्कार हो रहे हैं।
ऐसे दौर में जब किसी कोरोना मृतक के परिजन अपने चहेते की मृत काया को हाथ लगाने से भी डरते हैं, पास नहीं जाते, ऐसे दौर में ये स्वीपर कोरोना योद्धा की तरह अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस से उठाकर वाहन में रखकर मुक्तिधाम, कब्रिस्तान पहुंचाते हैं। यहां तपती दोपहरी में पीपीई किट पहनकर योद्धाओं की दूसरी टोली उनके लिए चिताओं को सजाती है, विधि विधान से अन्तिम संस्कार करती है। जबकि परिजन दूर छाया में खड़े होकर डर, भय के बीच कातर भाव से बस प्रणाम कर इतिश्री कर लेते हैं। तब इन दोनों के काम को देखकर मस्‍तिष्‍क स्‍वत: ही श्रद्धा से झुक जाता है। 
उल्‍लेखनीय है कि यहां नरयावलीनाका श्मशान घाट पर प्रहलाद रैकवार, प्रभारी अधिकारी कुलदीप बाल्मीकि, स्वच्छता निरीक्षक के साथ 13 सफाई मित्रों द्वारा कार्य किया जा रहा है जिसमें सफाई मित्र  आकाश करोसिया, रिंकू एवं अन्‍य द्वारा भी महत्वूर्ण सहयोग किया जा रहा है। काकागंज श्मशान घाट पर  कृष्ण कुमार चैरसिया, सहायक वाहन प्रभारी एवं  हरेन्द्र खटीक, प्रभारी अधिकारी काकांगज श्मशान घाट,  आशुतोष सोलंकी एवं गंधर्व सिंह ठाकुर, स्वच्छता निरीक्षक के साथ 12 सफाई मित्रों द्वारा कार्य किया जा रहा है। इसी प्रकार से अनिरुद्ध चाचोंदिया स्वच्छता निरीक्षक भूपेंद्र कोरी और शेलेन्द्र चौधरी दरोगा वरुण मनोज नरेंद्र सुनील सफाई कर्मचारी प्रतिदिन अपने कार्यों को अंजाम दे रहे हैं।

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