
भोपाल। मध्यप्रदेश में अब 15 से 20 मंजिल तक की बहुमंजिला इमारतों का निर्माण आसान होने जा रहा है। राज्य सरकार करीब 14 साल पुराने भूमि विकास नियमों में बदलाव कर भूमि विकास नियम 2026 लागू करने की तैयारी कर रही है। नए नियमों के ड्राफ्ट में इमारतों की ऊंचाई, फ्लोर एरिया रेशो (एफएआर) और प्लॉट पर निर्माण की सीमा को लेकर कई अहम बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। करीब 200 पेज का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है, जिसे जल्द उच्च स्तरीय बैठक में अंतिम रूप दिया जाएगा। प्रस्तावित बदलाव लागू होने के बाद प्रदेश के प्रमुख शहरों में 15 से 20 मंजिल तक की इमारतों का निर्माण मौजूदा व्यवस्था की तुलना में ज्यादा सहज हो सकेगा। खास बात यह है कि ऊंची इमारतों के लिए विशेष अनुमति की जरूरत वाली सीमा को भी बढ़ाने का प्रस्ताव है।
मौजूदा नियमों में 30 मीटर यानी करीब 10 मंजिल से अधिक ऊंची इमारतों की फाइल विशेष अनुमति के लिए नगर निगम आयुक्त की कमेटी के पास जाती है। नए प्रस्ताव में इस सीमा को बढ़ाकर 45 से 60 मीटर करने की तैयारी है। इसका सीधा असर यह होगा कि 15 से 20 मंजिल तक की कई इमारतों को वर्तमान व्यवस्था की तरह अतिरिक्त विशेष अनुमति की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। इससे भवन स्वामियों और डेवलपर्स के लिए निर्माण की मंजूरी प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान होने की उम्मीद है।
एफएआर 3 से बढ़ाकर 4 करने का प्रस्ताव
नए नियमों में एफएआर को भी बढ़ाने का प्रस्ताव है। वर्तमान में प्लॉट के आकार के आधार पर अधिकतम एफएआर 3 तक मिलता है। इसे बढ़ाकर 4 करने की तैयारी है। प्रस्तावित व्यवस्था में 2 बेस एफएआर रहेगा, जबकि अतिरिक्त 2 एफएआर प्रीमियम एफएआर के रूप में लिया जा सकेगा। इसके लिए बिल्डर या भवन निर्माता कलेक्टर गाइडलाइन के आधार पर निर्धारित राशि का भुगतान कर अतिरिक्त बिल्ट-अप एरिया हासिल कर सकेगा। इससे सीमित जमीन पर अधिक निर्माण की गुंजाइश बढ़ेगी और शहरी क्षेत्रों में ऊध्र्वाधर विकास को बढ़ावा मिलेगा।
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