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कैट ने सरकार से की पटाखा कारोबारियों को मुआवजा देने की मांग

– कारोबारी संगठन ने कहा, सरकार पर्यावरण कमेटियों को भंग करे

नई दिल्‍ली। कारोबारियों के संगठन कन्‍फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने दिल्ली में पर्यावरण सुरक्षा समिति के पटाखों को प्रतिबंधित करने के निर्णय पर नाराजगी व्यक्त की है। कैट ने कहा कि सभी राज्यों तथा केंद्र सरकार की पर्यावरण समितियों को भंग कर दिया जाना चाहिए।

कारोबारी संगठन ने कहा कि दिल्ली पर्यावरण सुरक्षा समिति का पटाखों को प्रतिबंधित करने का निर्णय सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। वहीं, कई लोगों की आजीविका पर इस निर्णय से पड़ने वाले असर को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की चुप्पी पर भी कैट ने सवाल उठाया है। कैट ने जारी एक बयान में पूछा कि लाखों लोगों की रोजी-रोटी पर केजरीवाल सरकार मौन क्यों हैं?

उल्लेखनीय है कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने 6 नवम्‍बर को एक आदेश जारी कर 7 से 30 नवम्‍बर तक दिल्ली में सभी प्रकार के पटाखों की बिक्री एवं इस्तेमाल को प्रतिबंधित कर दिया है। कैट ने इस बारे में कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। उसने सभी राज्यों से पटाखे का व्यापार करने वाले लोगों के नुकसान की भरपाई करने की भी मांग की है।

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने दिल्ली पर्यावरण कमेटी के आदेश को गरीब लोगों के पेट पर कुल्हाड़ी चलाने जैसा फैसला करार दिया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 12 मार्च, 2019 को देश में बढ़ती बेरोजगारी पर चिंता व्यक्त करते हुए पटाखों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना अनुचित बताया था। कोर्ट ने पटाखे पर प्रतिबंध के बजाय इस उद्योग के प्रदूषणकारी पहलू को ठीक करने का सुझाव दिया था। न्यायमूर्ति एके सीकरी की अगुवाई वाली इस पीठ ने तब निर्देश दिया था कि पूरे देश में केवल हरे रंग के पटाखे का इस्तेमाल और बिक्री की जाए। वहीं, न्यायमूर्ति बोबडे ने भी कहा था कि पटाखे भारत में अन्य देशों के विपरीत एक विशेष महत्व रखते हैं। उन्‍होंने पटाखे पर प्रतिबंध लगाने की बजाय पटाखे से संबंधित प्रदूषण से निपटने के लिए अन्य विकल्पों का पता लगाने का सुझाव दिया था। (एजेंसी, हि.स.)

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