भोपाल/गुना। मध्य प्रदेश के गुना (Guna mp) जिले में दूषित पानी (contaminated water;) की आशंका के बीच करीब डेढ़ दर्जन बच्चे बीमार पड़ गए हैं। उल्टी-दस्त और पेट संबंधी शिकायतों के बाद बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। कुछ बच्चों में पीलिया और हेपेटाइटिस-A जैसे संक्रमण (Infections such as hepatitis-A) के लक्षण मिलने की भी बात सामने आई है। मामले के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है।
जानकारी के अनुसार, गुना नगर पालिका के वार्ड क्रमांक-9 में पिछले कुछ दिनों से बच्चों की तबीयत अचानक खराब होने के मामले सामने आने लगे। परिजनों ने बताया कि बच्चों को लगातार उल्टी और दस्त की शिकायत होने लगी, जिसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। हालत गंभीर होने पर करीब डेढ़ दर्जन बच्चों को भर्ती कर डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि इलाके में पिछले कई दिनों से दूषित और गंदे पानी की सप्लाई हो रही थी, लेकिन समय रहते न तो लोगों को चेतावनी दी गई और न ही समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठाए गए। रहवासियों का कहना है कि यदि प्रशासन पहले सतर्कता बरतता तो इतनी बड़ी संख्या में बच्चे बीमार नहीं पड़ते। घटना के बाद नगरपालिका की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्र से पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे हैं। शुरुआती तौर पर दूषित पानी से संक्रमण फैलने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि असली वजह जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल अस्पताल में भर्ती बच्चों की स्थिति पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
इंदौर की घटना से जुड़ रही तुलना
गुना का यह मामला हाल ही में इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में सामने आए जलजनित संक्रमण की याद दिला रहा है। वहां कथित तौर पर सीवर का दूषित पानी पेयजल लाइन में मिलने से डायरिया का बड़ा प्रकोप फैला था, जिसमें दो हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए थे। उस घटना में कई लोगों की मौत की खबरें भी सामने आई थीं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि इंदौर जैसी बड़ी घटना के बाद भी स्थानीय निकायों ने पेयजल की गुणवत्ता और निगरानी को लेकर पर्याप्त सतर्कता क्यों नहीं बरती।
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