नई दिल्ली। क्षेत्रीय हवाई संपर्क (Regional Air Connectivity) बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई केंद्र सरकार की उड़ान (UDAN) योजना को छोटे शहरों में अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी है। सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत शुरू किए गए कई हवाई मार्ग पर्याप्त यात्री नहीं मिलने और परिचालन लागत बढ़ने के कारण समय से पहले बंद करने पड़े हैं।
679 में से सिर्फ 348 रूट ही चालू
सरकार के अनुसार, 10 जुलाई 2026 तक उड़ान योजना के तहत देशभर में 679 हवाई मार्ग शुरू किए गए थे। इनमें से 348 मार्ग ही नियमित रूप से संचालित हो रहे हैं, जबकि 165 मार्ग वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) की अवधि पूरी होने से पहले ही बंद कर दिए गए। सरकार का कहना है कि कई रूट पर यात्रियों की संख्या उम्मीद से कम रही, जिससे एयरलाइंस के लिए उनका संचालन आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं रहा।
उत्तर प्रदेश के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) पर भी उड़ानों की संख्या में कमी दर्ज की गई है। पहले यहां से 17 शहरों के लिए सेवाएं उपलब्ध थीं, जो अब घटकर 15 शहरों तक सीमित रह गई हैं। वहीं, प्रतिदिन उड़ानों की संख्या भी 36 से घटकर लगभग 28 से 30 रह गई है।
कुशीनगर एयरपोर्ट पर नहीं मिल रहे यात्री
उत्तर प्रदेश का कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी कम यात्री संख्या की समस्या से जूझ रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वर्ष यहां से कोई नियमित उड़ान संचालित नहीं हुई और इस वर्ष भी स्थिति में खास बदलाव नहीं आया है। जबकि इस एयरपोर्ट के विस्तार पर 108.22 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
सरकार ने शुरू की संशोधित उड़ान योजना
केंद्र सरकार ने 4 जुलाई 2026 से उड़ान योजना का संशोधित संस्करण लागू किया है। नई योजना का लक्ष्य अगले 10 वर्षों में 120 नए अविकसित और कम सेवा वाले हवाई गंतव्यों को हवाई नेटवर्क से जोड़ना और करीब 4 करोड़ यात्रियों को किफायती हवाई यात्रा उपलब्ध कराना है। इसके लिए राज्यों द्वारा प्रस्तावित हवाई अड्डों के विकास में चैलेंज मोड व्यवस्था अपनाई जाएगी।
सरकार ने यह भी बताया कि मुरादाबाद-लखनऊ रूट का संचालन पहले कर रही एयरलाइन फ्लाइबिग ने अनुबंध संबंधी जिम्मेदारियां स्काईहॉप को सौंप दी हैं। अब स्काईहॉप इस रूट पर उड़ानें शुरू करेगी। इसके अलावा मुरादाबाद को कानपुर, हिंडन, सहारनपुर और देहरादून से जोड़ने की भी योजना है।
क्यों सफल नहीं हो पाए कई हवाई मार्ग?
विशेषज्ञों और सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कई क्षेत्रीय रूटों के सामने कुछ प्रमुख चुनौतियां हैं—
छोटे हवाई अड्डों पर विमान में ईंधन भरने की सुविधा नहीं होने से एयरलाइंस की परिचालन लागत बढ़ जाती है।
कई मार्गों पर यात्रियों की संख्या उपलब्ध सीटों के मुकाबले काफी कम रहती है।
क्षेत्रीय उड़ानों के टिकट अपेक्षाकृत महंगे होने से यात्रियों की मांग प्रभावित होती है।
कई छोटे हवाई अड्डों तक सड़क और सार्वजनिक परिवहन की पर्याप्त कनेक्टिविटी नहीं होने से यात्रियों को असुविधा होती है।
इन चुनौतियों के बावजूद सरकार का कहना है कि संशोधित उड़ान योजना के जरिए क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने और छोटे शहरों तक सस्ती हवाई सेवाएं पहुंचाने के प्रयास जारी रहेंगे।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved