नई दिल्ली। भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को लेकर सोशल मीडिया (Social Media) पर एक नया विवाद सामने आया है। बांग्लादेश की राजधानी ढाका (Dhaka) के एक उपनगर में 150 से अधिक चीनी नागरिक पिछले तीन सप्ताह से वीडियो और लाइवस्ट्रीम बना रहे हैं। आरोप है कि ये लोग बांग्लादेश की पिछड़ी बस्तियों को भारत का बताकर चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित कर रहे हैं। इतना ही नहीं, इन वीडियो में भारतीयों के रहन-सहन, खानपान और सामाजिक परिस्थितियों को लेकर भ्रामक और अपमानजनक टिप्पणियां भी की जा रही हैं।
बांग्लादेश के प्रमुख समाचार पत्र ‘प्रथोम आलो’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इन चीनी नागरिकों की गतिविधियों को लेकर स्थानीय लोगों में भी नाराजगी है। हैरानी की बात यह है कि तीन सप्ताह से जारी इस गतिविधि की स्थानीय पुलिस और प्रशासन को भी शुरुआत में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआत में स्थानीय लोग चीनी नागरिकों के वीडियो बनाने के तरीके को देखकर प्रभावित थे, लेकिन बाद में उनकी गतिविधियों पर संदेह होने लगा। जब स्थानीय लोगों ने उनसे पूछा कि इन वीडियो का इस्तेमाल कहां किया जा रहा है, तो एक चीनी नागरिक ने बताया कि वह इन्हें चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीचैट के लिए बना रहा है।
चीन से आई फैंगयू नाम की एक इन्फ्लुएंसर ने भी बताया कि वे वीचैट और टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म के लिए लाइवस्ट्रीम करती हैं। हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि वह ढाका के कम विकसित इलाके से ही प्रसारण क्यों कर रही हैं, तो उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
बांग्लादेश की बस्ती को बता रहे नई दिल्ली
दरअसल, ढाका के उपनगर उत्तरा का टेकपारा इलाका घनी आबादी, संकरी गलियों और कमजोर बुनियादी सुविधाओं के लिए जाना जाता है। यहां बड़ी संख्या में लोग झुग्गियों और टीन की छत वाले मकानों में रहते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, चीनी इन्फ्लुएंसर सेक्टर-12 के आसपास विशेष रूप से वीडियो शूट करते हैं। इस इलाके में एक गंदी नहर भी बहती है।
प्रथोम आलो की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीनी इन्फ्लुएंसर अपने लाइव प्रसारण में इस इलाके को नई दिल्ली बताकर पेश कर रहे हैं। उनकी चीनी भाषा में कही गई बातों का गूगल ट्रांसलेट के माध्यम से अनुवाद करने पर इस तरह की टिप्पणियां सामने आईं।
रिपोर्ट के मुताबिक, मियानमियान नाम की एक चीनी महिला सेक्टर-12 में नहर के किनारे खड़े होकर लाइवस्ट्रीम कर रही थी। उसने दर्शकों से कहा, ‘यह नई दिल्ली है। यहां लोगों के घर बहुत गंदे हैं। टीन की छत वाले इन घरों में एक पंखा तक नहीं है। यह जगह पिछड़ी, गंदी और अस्वच्छ है। यहां कानून-व्यवस्था की स्थिति भी खराब है।’ इसके बाद उसने भारत में शौचालयों के इस्तेमाल को लेकर भी टिप्पणी की।
गाय के मूत्र से बनी चाय पीने का दावा
चीनी इन्फ्लुएंसर की टिप्पणियों में सबसे विवादित दावा चाय को लेकर किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, वांग वेई नाम की एक चीनी महिला टेकपारा में चाय की दुकानों का वीडियो बना रही थी। लाइवस्ट्रीम के दौरान उसने दुकानों पर चाय पी रहे लोगों को दिखाते हुए दावा किया कि वे गाय के मूत्र से बनी चाय पीते हैं।
एक अन्य दुकान के सामने खड़े होकर उसने चाय को नदी के गंदे पानी से बना हुआ बताया। इसके अलावा स्थानीय लोगों के रहन-सहन और घरों की स्थिति को लेकर भी अपमानजनक टिप्पणियां की गईं।
भारतीयों और बांग्लादेशियों को लेकर भी की गईं टिप्पणियां
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कुछ चीनी इन्फ्लुएंसर बांग्लादेशी पुरुषों के बारे में आपत्तिजनक बातें कर रहे थे। उनका कहना था कि पुरुषों के हाथ में पैसा आने पर वे उसका गलत इस्तेमाल करते हैं। कुछ महिला इन्फ्लुएंसर ने लाइवस्ट्रीम में यह भी कहा कि वे भारत में शादी करने के बाद अपने पति और परिवार के साथ रहती हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे गंभीर बात यह है कि बांग्लादेश में शूट किए जा रहे वीडियो को भारत का बताकर पेश किया जा रहा है। इससे दर्शकों के सामने भारत की गलत और नकारात्मक तस्वीर पेश होने की आशंका है।
चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भारत विरोधी सामग्री का आरोप
रिपोर्ट में इस घटनाक्रम को चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भारत विरोधी सामग्री के प्रसार से भी जोड़कर देखा गया है। इससे पहले सिंगापुर में भी चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भारत विरोधी और नस्लभेदी सामग्री को लेकर चिंता जताई गई थी।
स्थानीय लोगों और समाचार पत्र की ओर से पुलिस से इस मामले में जानकारी मांगे जाने पर अधिकारियों ने शुरुआत में अनभिज्ञता जताई। पुलिस का कहना था कि मामले की जानकारी जुटाने के लिए उच्च अधिकारियों से संपर्क किया गया है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इन चीनी इन्फ्लुएंसर के पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा है या वे व्यक्तिगत रूप से ऐसा कंटेंट बना रहे हैं। हालांकि, बांग्लादेश की बस्तियों को भारत का बताकर प्रसारित करने के आरोपों ने सोशल मीडिया पर भ्रामक सामग्री और नस्लभेदी प्रचार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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