
जबलपुर। बैंकों और सुरक्षा एजेंसियों के दावों के विपरीत शहर के अधिकांश एटीएम ग्राहकों की सुरक्षा के लिहाज से केवल औपचारिक व्यवस्था बनकर रह गए हैं। एटीएम के अंदर लगाए गए पैनिक बटन, सेंसर, स्पीकर अलर्ट और 24 घंटे निगरानी जैसे सुरक्षा तंत्र कागजों तक सीमित नजर आ रहे हैं। पड़ताल में सामने आया कि कई एटीएम में लंबे समय तक बिना कोई लेनदेन किए खड़े रहने के बावजूद न तो कोई चेतावनी सुनाई दी और न ही किसी निगरानी एजेंसी ने कोई प्रतिक्रिया दी।
पड़ताल के दौरान बस स्टैंड स्थित एसबीआई एटीएम में लगभग 15 मिनट तक बिना लेनदेन किए खड़े रहने के बावजूद स्पीकर से कोई चेतावनी नहीं आई। जबकि सुरक्षा मानकों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति बिना कारण एटीएम के भीतर अधिक देर तक रुका रहता है तो ऑडियो अलर्ट के जरिए उसे बाहर जाने की चेतावनी दी जानी चाहिए।रामपुर स्थित एसबीआई एटीएम और सिविक सेंटर स्थित यूनियन बैंक एटीएम में भी यही स्थिति देखने को मिली। कहीं भी सेंसर आधारित सुरक्षा प्रणाली सक्रिय नजर नहीं आई।
पड़ताल में सामने आईं बड़ी खामियां
पैनिक बटन की जानकारी अधिकांश ग्राहकों को नहीं।सेंसर और स्पीकर आधारित चेतावनी प्रणाली निष्क्रिय। बिना लेनदेन लंबे समय तक रुकने पर कोई अलर्ट नहीं।निगरानी का दावा, लेकिन कंट्रोल रूम से कोई प्रतिक्रिया नहीं। कई एटीएम में सुरक्षा मानकों का पालन अधूरा। जर्जर एटीएम और खराब रखरखाव से बढ़ा जोखिम। क्या शहर के एटीएम में लगी सुरक्षा प्रणाली केवल कागजी है? यदि पैनिक बटन दबाया जाए तो क्या वास्तव में पुलिस तक सूचना पहुंचेगी? सेंसर, कैमरे और ऑडियो अलर्ट की नियमित जांच कौन करता है? क्या बैंक और सुरक्षा एजेंसियां केवल दावे कर रही हैं, जबकि सिस्टम जमीनी स्तर पर निष्क्रिय है?
पैनिक बटन है… लेकिन कहां है?
एटीएम में पैनिक बटन लगाने का उद्देश्य लूट, हमला या किसी आपात स्थिति में ग्राहक को तत्काल सहायता उपलब्ध कराना है। दावा किया जाता है कि पैनिक बटन दबाते ही सूचना सुरक्षा एजेंसी और पुलिस तक पहुंच जाती है।लेकिन पड़ताल में यह भी सामने आया कि अधिकांश ग्राहकों को यह तक पता नहीं कि एटीएम में पैनिक बटन लगा कहां है। कई एटीएम में इसकी कोई स्पष्ट सूचना या संकेतक भी नहीं मिला।
मुंबई से निगरानी का दावा, जमीन पर असर नहीं दावा
बैंकों का दावा है कि शहर के कई एटीएम की निगरानी मुंबई स्थित निजी कंट्रोल रूम से की जाती है। कैमरों और सेंसर के माध्यम से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। लेकिन वास्तविकता यह है कि कई मिनट तक एटीएम के भीतर मौजूद रहने पर भी कोई अलर्ट या हस्तक्षेप सामने नहीं आया।इससे सवाल उठता है कि यदि वास्तविक लूटपाट या बंधक जैसी घटना हो जाए तो क्या यह सुरक्षा तंत्र समय पर सक्रिय हो पाएगा?
सुरक्षाकर्मी बैठे, फिर भी सिस्टम खामोश
कई एटीएम में सुरक्षाकर्मी खुद लंबे समय तक केबिन के भीतर बैठे मिले, लेकिन सेंसर और ऑडियो अलर्ट सक्रिय नहीं हुए। इससे यह भी संकेत मिलता है कि या तो सिस्टम बंद पड़े हैं या उनकी नियमित मॉनिटरिंग नहीं हो रही।
खस्ताहाल एटीएम भी बढ़ा रहे खतरा
सिविक सेंटर स्थित एक एटीएम की स्थिति जर्जर मिली, जबकि जेडीए मुख्यालय के नीचे बने एटीएम के प्रवेश द्वार पर आवारा कुत्ता लेटा मिला। ऐसे हालात में ग्राहक सुरक्षा और सुविधा दोनों प्रभावित हो रही हैं।
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