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150 करोड़ का कालभैरव महालोक बनना शुरू..दर्शन व्यवस्था भी बदली

October 28, 2026

उज्जैन। प्रसिद्ध कालभैरव मंदिर में सिंहस्थ से पहले महालोक बनाया जा रहा है जिस पर 150 करोड़ रुपए खर्च होंगे तथा एक लोहे का पुल भी तैयार किया जा रहा है। निर्माण के चलते कालभैरव मंदिर की दर्शन व्यवस्था बदल दी है और पीछे के निर्गम द्वार से प्रवेश कराया जा रहा है।



  • महाकाल मंदिर के बाद अब काल भैरव मंदिर परिसर को विकसित करने की तैयारी हो चुकी है। इसके लिए 163 करोड़ रुपए की विस्तृत परियोजना तैयार की गई है। योजना में दो मल्टीलेवल पार्किंग, कॉम्प्लेक्स, श्रद्धालुओं के लिए सुविधा केंद्र, नई पहुंच मार्ग और परिसर का विकास शामिल है। योजना का उद्देश्य काल भैरव मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देना और सिंहस्थ के दौरान भीड़ को व्यवस्थित करना है। इसके तहत सामान्य दर्शनार्थियों, वीआईपी और विशेष प्रवेश के लिए अलग-अलग द्वार बनाने का प्रस्ताव है। परिसर में पार्क और बड़ी मूर्ति भी स्थापित की जाएगी। यहां शुरू हो रहे निर्माण कार्यों के चलते काल भैरव मंदिर में दर्शन व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है और श्रद्धालुओं को मुख्य द्वार की बजाय निगम द्वारा से प्रवेश कराया जा रहा है। मुख्य द्वार के सामने और परिसर में निर्माण कार्यों की शुरुआत हो चुकी है।

    पार्किंग पर 49 करोड़, कॉम्प्लेक्स पर 55 करोड़
    प्रस्तावित योजना में कॉम्प्लेक्स निर्माण पर 55 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। दो मल्टीलेवल पार्किंग के लिए 49 करोड़ रुपए रखे गए हैं। विद्युत और यांत्रिक कार्यों पर 51 करोड़ तथा अन्य विकास कार्यों पर 8 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रस्ताव है। इस तरह कुल लागत 163 करोड़ रुपए होगी। उल्लेखनीय है कि काल भैरव मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सिंहस्थ के दौरान भी यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही बढऩे की संभावना है। इसे देखते हुए प्रवेश व्यवस्था, पार्किंग और परिसर में सुविधाएं विकसित करने की योजना बनाई गई है। परियोजना में अलग-अलग प्रवेश द्वार और नई अप्रोच रोड भी प्रस्तावित है।

    महाकाल से पहले कालभैरव के दर्शन की जानकारी
    शहर में प्रतिदिन हजारों बाहरी श्रद्धालु दर्शन के लिए उज्जैन पहुँचते हैं और कालभैरव मंदिर को इतनी प्रसिद्धि मिल चुकी है कि ऑटो और ई रिक्शा चालकों द्वारा श्रद्धालुओं को यह बताया जाता है कि महाकालेश्वर के दर्शन से पहले कालभैरव के दर्शन करना आवश्यक है, इसके चलते श्रद्धालु उज्जैन आकर सबसे पहले कालभैरव के दर्शन करने जाते हैं, इसके बाद महाकाल मंदिर सहित अन्य मंदिरों में पहुँचते हैं।

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