
उज्जैन। शहर के बीचोबीच नानाखेड़ा जैसी प्राइम लोकेशन में करोड़ों की लागत से बने नैवेद्य लोक लोकार्पण के महीनों बाद भी सन्नाटा हैं, क्योंकि, यहां बनी 34 दुकानों के लिए खरीददार नहीं मिल रहे हैं ऐसे में इस प्रोजेक्ट में यूडीए का अच्छा खासा पैसा उलझ के फंस गया हैं।
उल्लेखनीय है कि एक तरफ जनता को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलती, तो दूसरी तरफ फिजुल के कार्यों पर करोड़ों रुपए सरकारी विभागों द्वारा खर्च किए जाते हैं। उदाहरण के लिए नगर निगम जहां सौंदर्यीकरण से लेकर रोटरी को लगाने सहित कई फैंसी कार्यों पर पैसा खर्च करता है तो उज्जैन विकास प्राधिकरण में काबिज रहा राजनीतिक बोर्ड नानाखेड़ा स्थित नैवेद्य लोक की दुकानों की बेचने पर जुटा है, इसके लिए प्राधिकरण के जिम्मेदार खुद योग्य खरीददार की तलाश में जुटे हैं। इसके लिए टेंडर भी बुलाए और प्रस्ताव मांगे, लेकिन कोई भी बड़े व्यापारी और एजेंसी इसके संचालन के लिए नहीं मिल सकी। ऐसे में यूडीए की ये प्रापर्टी अब फंस गई हैं। ऐसा नहीं है कि बिना योजना के, बिना आवश्यकता के इन्हें बनवाया गया, लेकिन दुकानों के रेट ऐसे हैं कि उज्जैन तो दूर इंदौर और अन्य बड़े शहरों के खरीददार भी यहाँ पैसा उलझाने में बिचक रहे हैं।
प्रतिकल्पा कॉम्प्लेक्स के भी यही हाल..
उज्जैन विकास प्राधिकरण ने 40 करोड़ से अधिक की 40 हजार वर्गफीट जमीन पर 24 करोड़ से 7 मंजिला शॉपिंग कॉम्पलेक्स ‘प्रतिकल्पाÓ बनाया गया है। इसमें 53 टू व थ्री बीएचके फ्लैट, 29 बड़ी दुकानें तो 52 चार पहिया वाहनों की पार्किंग है। यहां भूतल पर 9 दुकानें (डबल हाइट), मध्यतल 2 व प्रथम तल 11 दुकानें। दूसरी से 7वीं मंजिल तक 1 जिम, 24 टू-बीएचके, 29 थ्री-बीएचके। बेसमेंट में 27 और सिटल्ट पार्किंग में 29 चार पहिया वाहन, लेकिन कॉम्प्लेक्स की दुकानें भी नहीं बिक पा रही हैं।
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