
वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच बढ़ते तनाव में नरमी के संकेत मिलते ही अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार (International crude oil market) में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) दोनों के दाम एक सप्ताह की सबसे बड़ी गिरावट के साथ जुलाई के निचले स्तर पर पहुंच गए। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका द्वारा ईरान पर प्रस्तावित हवाई हमलों को फिलहाल टालने से बाजार में कूटनीतिक समाधान की उम्मीद बढ़ी है, जिससे तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं कुछ कम हुई हैं।
सोमवार को ब्रेंट क्रूड 8.42 डॉलर (8.7%) टूटकर 88.36 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो 17 जुलाई के बाद का सबसे निचला स्तर है। वहीं WTI क्रूड 6.70 डॉलर (7.5%) की गिरावट के साथ 82.61 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो 16 जुलाई के बाद का सबसे कम स्तर माना गया।
हमले टलने से बाजार में लौटा भरोसा
तेल की कीमतों में गिरावट की प्रमुख वजह अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोकना माना जा रहा है। इस फैसले से कूटनीतिक बातचीत की संभावनाएं मजबूत हुई हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद जगी है। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था। उस समय क्षेत्रीय तनाव के कारण होर्मुज और रेड सी के रास्ते तेल आपूर्ति प्रभावित हुई थी, जिससे सऊदी अरब के निर्यात पर भी असर पड़ा था।
ट्रंप बोले- बातचीत को दिया गया मौका
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कूटनीति को अधिक समय देने के उद्देश्य से सैन्य कार्रवाई फिलहाल स्थगित की है। ट्रंप ने भी कहा कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और समझौते की संभावना बनी हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि बातचीत विफल रहती है तो अमेरिका सैन्य विकल्प अपनाने से पीछे नहीं हटेगा।
सऊदी और रूस से जुड़े घटनाक्रम पर भी नजर
इस बीच सऊदी अरब ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने इराक की ओर से भेजे गए ड्रोन को मार गिराया। वहीं यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के यनबू तेल निर्यात हब से जुड़ी आपूर्ति लाइनों को निशाना बनाने की जिम्मेदारी ली है। विशेषज्ञों का कहना है कि सैन्य कार्रवाई में अस्थायी विराम के बावजूद वैश्विक तेल आपूर्ति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।
कजाकिस्तान का उत्पादन भी प्रभावित
रूस के ब्लैक सी स्थित प्रमुख तेल निर्यात टर्मिनल पर ड्रोन हमलों के कारण कजाकिस्तान का दैनिक तेल उत्पादन भी आधे से कम रह गया। हालांकि बाद में ऊर्जा मंत्रालय ने जानकारी दी कि कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम के ब्लैक सी टर्मिनल से तेल की लोडिंग फिर शुरू कर दी गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच कोई औपचारिक समझौता नहीं होता, तब तक वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
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