
इंदौर। इंदौर (Indore) में करीब सात साल पहले हुई एक सनसनीखेज हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। एरोड्रम थाना क्षेत्र के इस हत्याकांड में नवम अपर सत्र न्यायाधीश विवेक कुमार चंदेल की अदालत ने छह आरोपियों को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं हत्या के सबूत मिटाने और शव को ठिकाने लगाने के मामले में भी सभी आरोपियों को 7 वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया गया है।
24 दिसंबर 2019 को बगीचे के पास मिला था अज्ञात शव
अभियोजन के मुताबिक, 24 दिसंबर 2019 की सुबह करीब 8:30 बजे कमल तेलंग काम पर जा रहे थे। अम्बिकापुरी कॉलोनी के बगीचे के पास उन्हें करीब 35 से 40 साल के एक व्यक्ति का शव पड़ा दिखाई दिया।सूचना पर एरोड्रम पुलिस मौके पर पहुंची। जांच में मृतक के शरीर पर कई गंभीर चोटें मिलीं। धारदार हथियार से चोट के निशान थे। मृतक के मुंह और नाक पर लाल रंग का दुपट्टा बंधा था, जबकि हाथ प्लास्टिक की पट्टी से बंधे हुए थे।मौके की जांच और पोस्टमार्टम से पुलिस को शक हुआ कि हत्या कहीं और की गई और शव को बाद में यहां लाकर फेंका गया।
एक दिन बाद हुई मृतक की पहचान
पुलिस ने अज्ञात शव की पहचान के प्रयास शुरू किए। 25 दिसंबर को मृतक की पहचान इंदर वर्मा, उम्र 33 वर्ष के रूप में उसकी पत्नी सीमा वर्मा ने की।इसके बाद मर्ग जांच के आधार पर पुलिस ने हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई।
पुरानी रंजिश बनी हत्या की वजह
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि इंदर का कुछ लोगों से पुराना विवाद था। इसी कड़ी में लक्ष्मी से पूछताछ हुई। अभियोजन के अनुसार, जांच में सामने आया कि संगीता और उसके साथियों ने इंदर के साथ मारपीट की थी।पुलिस की विवेचना के मुताबिक 23 दिसंबर की रात इंदर को पुराने विवाद का समझौता कराने के नाम पर बुलाया गया था। वहां विवाद बढ़ गया और आरोपियों ने डंडों और चाकू से उस पर हमला कर दिया।मारपीट के बाद इंदर बेहोश होकर गिर पड़ा। आरोपियों को जब लगा कि उसकी मौत हो चुकी है तो कथित तौर पर उन्होंने शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई।
लाश को एक्टिवा पर रखकर फेंक आए
अभियोजन के अनुसार, आरोपियों ने इंदर के हाथ बांधे और उसके मुंह व गले पर दुपट्टा बांध दिया। इसके बाद शव को संगीता की एक्टिवा पर रखा गया।पुलिस के मुताबिक, संगीता एक्टिवा चला रही थी, जबकि रोहित उर्फ लालू पीछे बैठकर शव को संभाल रहा था। इसके बाद शव को अम्बिकापुरी मेन क्षेत्र में सुनसान जगह पर फेंक दिया गया।जांच के दौरान पुलिस ने CCTV फुटेज भी जुटाए और आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ न्यायालय में अभियोग-पत्र प्रस्तुत किया।
इन छह आरोपियों को मिली उम्रकैद
अदालत ने संगीता पति गब्बर गौड़, रोहित उर्फ लालू, राजेश बौरासी, बबलू मालवीय, अजय उर्फ कालू भोई और करण उर्फ भूरी को दोषी पाया।प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुरेंद्र सिंह वास्केल ने पैरवी की। सात साल बाद आया फैसला, लेकिन सवाल छोड़ गया पूरा घटनाक्रम एक पुराने विवाद का समझौता कराने के नाम पर बुलाना, फिर कथित तौर पर बेरहमी से हमला करना और मौत के बाद शव को ठिकाने लगाने की कोशिश—इस पूरे घटनाक्रम ने मामले को बेहद गंभीर बना दिया था।अब करीब सात साल बाद अदालत के फैसले ने इस हत्याकांड में दोषियों को कठोर सजा दी है। खास बात यह रही कि अदालत ने सिर्फ हत्या ही नहीं, बल्कि शव को ठिकाने लगाने और साक्ष्य मिटाने के अपराध को भी अलग से गंभीरता से लेते हुए सजा सुनाई।
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