img-fluid

फादर्स-डे पर बेटियों का अनोखा गिफ्ट… किडनी-लीवर देकर पिता की बचाई जान

June 17, 2026

गाजियाबाद: अक्सर कहा जाता है कि बेटियां परिवार की शान और अभिमान होती हैं, लेकिन गाजियाबाद के मोरटा गांव की दो बेटियों ने इसे सच साबित कर दिखाया है. जब उनके पिता के जीवन पर मौत का संकट मंडराया, तो दोनों बेटियां काल के सामने चट्टान की तरह खड़ी हो गईं. आगामी फादर्स डे से ठीक एक हफ्ते पहले, एक बेटी ने अपनी किडनी और दूसरी ने अपने लीवर का हिस्सा दान कर अपने पिता को नए जीवन का सबसे अनमोल तोहफा दिया है.

मोरटा गांव के रहने वाले 45 वर्षीय जयंत त्यागी (जो पूर्व में भाजपा के सेक्टर संयोजक भी रह चुके हैं) बेहद सात्विक और सामान्य जीवन जीते हैं. अचानक वे एक गंभीर बीमारी की चपेट में आ गए. डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि उनके लीवर और किडनी दोनों खराब हो चुके हैं और उन्हें तुरंत ट्रांसप्लांट (प्रत्यारोपण) की जरूरत है. यह सुनते ही पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. लेकिन इस कठिन घड़ी में उनकी दोनों बेटियां परिवार की सबसे बड़ी ढाल बनकर सामने आईं.


  • हाल ही में बीटेक (B.Tech) की पढ़ाई पूरी करने वाली बड़ी बेटी रिषिका त्यागी ने बिना सोचे अपनी एक किडनी पिता को दान करने का फैसला लिया. भावुक करने वाली बात यह है कि कुछ ही महीनों बाद रिषिका की शादी होने वाली है. जब रिषिका ने अपने इस फैसले की जानकारी अपने होने वाले ससुराल पक्ष को दी, तो उन्होंने शादी की परवाह न करते हुए रिषिका के इस साहसी कदम का पूरा समर्थन किया और उसका उत्साह बढ़ाया. वहीं, बीटेक प्रथम वर्ष में पढ़ने वाली छोटी बेटी खुशी ने भी अपने कदम पीछे नहीं खींचे और पिता को लीवर दान करने का ऐतिहासिक फैसला किया.

    दोनों बेटियों का सिर्फ एक ही संकल्प था- पापा को कुछ नहीं होने देंगे. डॉक्टरों की टीम ने परिवार के कई सदस्यों की जांच की थी, लेकिन दोनों बेटियों की रिपोर्ट सबसे सटीक बैठी. लंबी काउंसलिंग और सभी चिकित्सीय प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद, नोएडा के एक निजी अस्पताल में सोमवार को डॉक्टरों की टीम ने एक बेहद जटिल और लंबे ऑपरेशन के बाद सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया पूरी की. वर्तमान में जयंत त्यागी और उनकी दोनों बेटियों की हालत स्थिर और सामान्य बनी हुई है.

    जयंत त्यागी के छोटे भाई अमित रंजन ने बताया कि शुरुआत में परिवार बेटियों के स्वास्थ्य और भविष्य को लेकर बेहद चिंतित था, लेकिन बेटियों के इस अटूट भरोसे के आगे कि “पापा हैं तो सब कुछ है,” सबको झुकना पड़ा. इस ऑपरेशन के दौरान बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता भी रक्तदान करने अस्पताल पहुंचे थे. भाजपा महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल समेत मोरटा गांव और संगठन से जुड़ा हर व्यक्ति इन दोनों बेटियों के साहस, त्याग और समर्पण को सलाम कर रहा है. यह कहानी समाज के लिए एक ऐसी मिसाल है जो बताती है कि बेटियां माता-पिता के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं.

    Share:

  • क्रिकेट प्रेमियों के लिए सुपर बुधवार, 16 घंटे में 7 बड़े मुकाबले; तीन देशों में एक साथ मैदान पर उतरेंगी भारतीय टीमें

    Wed Jun 17 , 2026
    नई दिल्ली ।क्रिकेट प्रशंसकों (Cricket Fans) के लिए 17 जून का दिन रोमांच, प्रतिस्पर्धा और लगातार एक्शन से भरपूर रहने वाला है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट (International Cricket) कैलेंडर में ऐसा कम ही देखने को मिलता है जब एक ही दिन इतने बड़े मुकाबले अलग-अलग देशों में खेले जाएं। बुधवार को कुल सात प्रमुख मैचों का आयोजन […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved