गंगटोक। पूर्वी सिक्किम (East Sikkim) की बर्फीली पहाड़ियों में करीब 13 हजार फीट की ऊंचाई पर अब सिर्फ सैनिकों की चौकसी ही नहीं, बल्कि स्थानीय बेटियों के हौसले की भी मिसाल देखने को मिल रही है। बाबा हरभजन सिंह मंदिर (Baba Harbhajan Singh Temple) के पास शुरू हुआ एक खास कैफे इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है, क्योंकि इसका संचालन पूरी तरह स्थानीय महिलाओं के हाथों में है।
भारतीय सेना की त्रिशक्ति कोर ने सिविल प्रशासन और स्थानीय समुदाय के सहयोग से इस पहल को शुरू किया है। ‘रणभूमि दर्शन’ नाम की इस परियोजना का मकसद सीमावर्ती इलाकों में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर पैदा करना है।
उच्च हिमालयी क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भी यह कैफे राहत का केंद्र बन गया है। लंबी और कठिन यात्रा के दौरान यहां भोजन और आराम की सुविधा मिलने से यात्रियों का अनुभव बेहतर हो रहा है। माना जा रहा है कि इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।
सेना और नागरिक प्रशासन के संयुक्त प्रयास से तैयार यह मॉडल अब सीमावर्ती इलाकों में विकास की नई मिसाल माना जा रहा है। कठिन मौसम और सीमित संसाधनों के बावजूद स्थानीय महिलाओं को रोजगार से जोड़ना इस पहल की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है।
इस परियोजना का असर केवल कैफे तक सीमित नहीं है। इससे स्थानीय उत्पादों, संस्कृति और छोटे व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलने लगा है। आसपास के गांवों के लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक लाभ पहुंच रहा है। बर्फीली ऊंचाइयों के बीच बेटियों द्वारा चलाया जा रहा यह कैफे अब महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत की प्रेरणादायक तस्वीर बनकर उभर रहा है।
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