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आत्मनिर्भर भारत की रक्षा ताकत: अब टैंक, तोप और मिसाइलों में लगेगा चंडीगढ़ में बना नेविगेशन सिस्टम, 24 यूनिट तैयार

November 01, 2026

चंडीगढ़। भारतीय सेना (Indian Army) के टैंकों, तोपों और मिसाइलों (Cannons and missiles) में अब स्वदेशी इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS Sigma-30N) का इस्तेमाल किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत ऑर्डनेंस फैक्टरी चंडीगढ़ में इंडियन ऑप्टिकल लिमिटेड और फ्रांस की कंपनी सफ्रान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड डिफेंस के सहयोग से इस सिस्टम का निर्माण किया जा रहा है। अब तक इस तकनीक के लिए भारत को विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था। स्वदेशी स्तर पर इसका उत्पादन शुरू होना रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

इस परियोजना में तकनीक फ्रांस की ओर से उपलब्ध कराई गई है, जबकि सिस्टम का निर्माण भारत में किया जा रहा है। इसके लिए 22 दिसंबर 2025 को भारतीय और फ्रांसीसी कंपनियों के बीच समझौता हुआ था। समझौते के बाद चंडीगढ़ स्थित ऑर्डनेंस फैक्टरी में उत्पादन शुरू किया गया।


  • अब तक तैयार हुए 24 नेविगेशन सिस्टम

    ऑर्डनेंस फैक्टरी में अब तक आईएनएस सिग्मा-30 एन की 24 यूनिट तैयार की जा चुकी हैं। इनकी पहली खेप अत्याधुनिक रक्षा विनिर्माण एवं इंजीनियरिंग इकाई सूरत भेजी गई है। समझौते में विशेषाधिकार संबंधी प्रावधान भी शामिल हैं। इसके तहत अगले 15 वर्षों तक चंडीगढ़ की ऑर्डनेंस फैक्टरी को इस सिस्टम के उत्पादन का विशेष अधिकार रहेगा।

    इस व्यवस्था के अनुसार सरकारी और निजी क्षेत्र की रक्षा विनिर्माण इकाइयों को भी यह नेविगेशन सिस्टम इसी फैक्टरी से खरीदना होगा। अगले महीने तक 26 और सिस्टम तैयार करने का लक्ष्य है। वहीं, अगले दो वर्षों में कुल 1,700 सिस्टम के निर्माण की योजना बनाई गई है।

    10 साल में 25 से 30 हजार करोड़ के ऑर्डर की उम्मीद

    इस परियोजना को लेकर रक्षा क्षेत्र में बड़े कारोबारी अवसरों की भी संभावना जताई जा रही है। दावा है कि आगामी 10 वर्षों में इस नेविगेशन सिस्टम के लिए 25 हजार से 30 हजार करोड़ रुपये तक के ऑर्डर मिल सकते हैं। इससे देश की रक्षा विनिर्माण क्षमता को बढ़ावा मिलने के साथ आयात पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी।

    टॉरपीडो के लिए भी तैयार की स्वदेशी मरीन वायर

    ऑर्डनेंस फैक्टरी चंडीगढ़ ने रक्षा उत्पादन में एक और उपलब्धि हासिल करते हुए टॉरपीडो के लिए स्वदेशी मरीन वायर भी तैयार की है। टॉरपीडो पानी के भीतर इस्तेमाल होने वाला विस्फोटक हथियार है। अब तक इसके लिए आवश्यक मरीन वायर जर्मनी से आयात की जाती थी। स्वदेशी स्तर पर इसका निर्माण शुरू होने से इस क्षेत्र में भी विदेशी निर्भरता घटाने की दिशा में कदम बढ़ा है।

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