
नई दिल्ली । कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Congress MP Shashi Tharoor) ने कहा कि परिसीमन बिल (Delimitation Bill) ‘राजनीतिक नोटबंदी’ है (Is ‘Political Demonetisation’ ) ।
परिसीमन बिल को लेकर लोकसभा में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए इसे ‘राजनीतिक नोटबंदी’ करार दिया है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि इस प्रक्रिया को जल्दबाजी में लागू करना देश के संघीय ढांचे के लिए नुकसानदायक हो सकता है। शशि थरूर ने मशहूर नारा ‘जस्ट डू इट’ को उलटते हुए कहा-‘डॉन्ट डू इट’। उन्होंने 2016 की नोटबंदी का जिक्र करते हुए इसे एक सबक बताया। शशि थरूर ने कहा, “आप परिसीमन को उसी जल्दबाजी में ला रहे हैं, जैसे नोटबंदी लाई गई थी। हमने देखा कि उससे कितना नुकसान हुआ। परिसीमन भी राजनीतिक नोटबंदी साबित हो सकता है, इसलिए इसे लागू मत कीजिए।”
उन्होंने आगे कहा कि परिसीमन में तीन बड़े मुद्दों पर ध्यान देना जरूरी है। पहला, छोटे और बड़े राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखना। दूसरा, उन राज्यों के साथ न्याय करना जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण की नीति का पालन किया। शशि थरूर ने आरोप लगाया कि इस बिल से ऐसा लगता है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में असफलता पाई है, उन्हें ‘इनाम’ दिया जा रहा है, जबकि दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय हो रहा है।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, “परिसीमन देश की संवैधानिक संरचना, केंद्र और राज्यों के बीच के संबंधों पर असर डालेगा। जिस तरह से परिसीमन को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसका जो विकृत रूप कश्मीर और असम के मुद्दों में देखने को मिला है, वह गंभीर चिंताएं पैदा करता है। इसके बाद, जो कोई भी सचमुच भारत माता से प्रेम करता है, उसके लिए इस सरकार पर भरोसा करना मुश्किल हो जाएगा।” प्रमोद तिवारी ने आगे कहा, “हमारा कहना है कि 2023 में पारित अधिसूचना के अनुसार, मौजूदा लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण को मंजुरी दी गई थी। हम चाहते थे कि इसे 2024 से ही लागू किया जाए, लेकिन आपने ऐसा नहीं किया। जहां तक मौजूदा स्थिति का सवाल है, जब इसे पहले ही लागू किया जा चुका है, तो इसे फिर से क्यों लाया गया है?”
कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमन सिंह ने कहा, “मौजूदा भ्रम की स्थिति में, ऐसा लगता है कि सरकार राजनीतिक फायदे के लिए काम करने की कोशिश कर रही है। अगर हम महिला आरक्षण बिल की बात करें, जैसा कि हमारी नेता प्रियंका गांधी ने गुरुवार को सदन में साफ़ तौर पर कहा था, अगर आपकी नीयत साफ़ है और आपकी इच्छा ईमानदार है और अगर आप सचमुच इसे लागू करना चाहते हैं, तो आपके पास पहले से ही पूरे विपक्ष और कांग्रेस पार्टी का समर्थन है। आप मौजूदा 543 सीटों के भीतर ही एक-तिहाई आरक्षण लागू कर सकते हैं, तो फिर दिक्कत क्या है?”
वहीं, डीएमके सांसद कनिमोझी ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विशेष सत्र में कुछ ही दिनों के भीतर इस बिल को पास कराने की कोशिश साजिश है। संविधान के तहत राज्यों को अपने अधिकार प्राप्त हैं और उन्हें हर फैसले के लिए केंद्र पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार राज्यों के अधिकारों को नजरअंदाज कर रही है और सब कुछ दिल्ली से नियंत्रित करना चाहती है। उनके मुताबिक, यह कदम संघीय ढांचे के खिलाफ है और राज्यों की स्वायत्तता को कमजोर करता है। परिसीमन को आरक्षण से जोड़ने पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं के मुद्दों को लेकर न तो गंभीर है और न ही संवेदनशील, बल्कि वह 2011 की जनगणना के आंकड़ों को परिसीमन का आधार बनाकर खुद को ही फायदा पहुंचा रही है।
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