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लिखित भरोसा नहीं पड़ा भारी? आंदोलन खत्म होने के बाद CJP को अब क्यों सता रहा है सबसे बड़ी चूक का डर

July 30, 2026

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चले छात्र आंदोलन को 25 जुलाई को सरकार के साथ बनी सहमति के बाद समाप्त कर दिया था। लेकिन आंदोलन (Agitation / Protest Movement) खत्म होने के कुछ ही दिनों बाद संगठन एक बार फिर सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगा रहा है। विवाद की सबसे बड़ी वजह वह लिखित आश्वासन है, जो CJP के नेताओं के मुताबिक अब तक उन्हें नहीं मिला है।

CJP का कहना है कि यदि प्रदर्शन के दौरान दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए गए और गिरफ्तार लोगों को पूरी तरह राहत नहीं मिली तो संगठन दोबारा आंदोलन का रास्ता अपना सकता है।



  • समझौते के बाद क्यों बढ़ा विवाद?

    20 जून को शिक्षा व्यवस्था में सुधार और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन 25 जुलाई को समाप्त हुआ। सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने वार्ता की, जबकि CJP की तरफ से सौरव दास और आशुतोष रांका मौजूद रहे।

    बैठक के बाद दोनों पक्षों ने मीडिया के सामने घोषणा की थी कि आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों पर राहत देने, भविष्य में प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं करने और अन्य मांगों पर सहमति बनी है। इसके बाद CJP ने धरना समाप्त करने का ऐलान कर दिया।

    बिहार और असम में हुई कार्रवाई

    सरकार ने समझौते के बाद बिहार और असम में आंदोलन से जुड़े कई मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी। बिहार के 20 जिलों में दर्ज 64 मुकदमों और असम के पांच मामलों में कार्रवाई की गई। कुछ गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की रिहाई भी शुरू हुई।

    हालांकि, CJP का कहना है कि देशभर में एक समान कार्रवाई और पूरे समझौते का लिखित रिकॉर्ड अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी चिंता

    मामले ने नया मोड़ तब लिया जब सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान जांच जारी रखने की अनुमति देते हुए कहा कि निर्दोष लोगों की गिरफ्तारी न की जाए। अदालत ने केंद्र और संबंधित राज्यों से अगली सुनवाई में अपना पक्ष रखने को कहा है।

    इसी आदेश के बाद CJP ने आशंका जताई कि यदि सरकार ने अदालत के समक्ष समझौते का उल्लेख नहीं किया तो प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच आगे भी जारी रह सकती है।

    CJP ने सरकार से क्या कहा?

    CJP नेता सौरव दास का कहना है कि 25 जुलाई को हुई बैठक में मुकदमे वापस लेने और भविष्य में कार्रवाई नहीं करने का भरोसा दिया गया था। उनका दावा है कि लिखित दस्तावेज 28 जुलाई तक देने की बात भी कही गई थी, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ।

    सौरव दास ने कहा कि यदि सरकार अपने आश्वासन से पीछे हटती है और प्रदर्शनकारियों को परेशान किया जाता है तो संगठन छात्रों के समर्थन में फिर से आंदोलन शुरू करने पर विचार करेगा।

    लिखित समझौते पर क्यों उठ रहे सवाल?

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आंदोलन समाप्त करते समय CJP ने सरकार के मौखिक आश्वासन पर भरोसा किया। अब जबकि मामला न्यायालय तक पहुंच चुका है, संगठन लिखित दस्तावेज नहीं होने को अपनी सबसे बड़ी कमजोरी मान रहा है।

    इसी वजह से विपक्ष और कई राजनीतिक विश्लेषक यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या आंदोलन समाप्त करने से पहले CJP को औपचारिक लिखित समझौता अपने पास सुरक्षित कर लेना चाहिए था।



  • 25 जुलाई को क्या कहा था दोनों पक्षों ने?

    वार्ता के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा था कि प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामलों, भविष्य में कार्रवाई नहीं करने और अन्य मांगों पर सकारात्मक सहमति बनी है। वहीं CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका ने भी सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि सरकार के आश्वासन के आधार पर आंदोलन तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जा रहा है।

    अब आगे क्या?

    फिलहाल बिहार और असम में केस वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और कई प्रदर्शनकारियों को राहत भी मिली है। हालांकि, बाकी राज्यों में स्थिति, सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और सरकार की आगे की रणनीति पर सभी की नजर टिकी हुई है।

    सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार CJP को लिखित आश्वासन देगी या फिर आंदोलन से जुड़े मामलों पर अंतिम फैसला अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगा। आने वाले दिनों में यही इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा।

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