नई दिल्ली। मतदाता सूची (Voter List) के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच भाजपा (BJP) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर से भी चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठी है। NDA के तीन सहयोगी दलों- लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों और जनता के बीच बने भ्रम को दूर करने के लिए चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण और पारदर्शिता की मांग की है।
LJP (रामविलास) प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने शुक्रवार को पटना में कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और सरकार की ओर से उसका बचाव किए जाने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, यदि आयोग के कामकाज को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो उसे खुद सामने आकर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।
पासवान ने कहा कि विपक्ष क्या आरोप लगा रहा है, इससे उन्हें कोई लेना-देना नहीं है। विपक्ष का काम आरोप लगाना और मुद्दे का राजनीतिकरण करना हो सकता है, लेकिन आम लोगों के मन में पैदा हुए संदेह को दूर करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि लोगों का चुनावी व्यवस्था से भरोसा उठने लगे तो यह लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं होगा।
RLM अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए SIR को लेकर चुनाव आयोग से तत्काल स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि SIR से जुड़े विवाद के कारण जनता के बीच काफी भ्रम की स्थिति है। इसे दूर करने के लिए आयोग को वास्तविक स्थिति पर जल्द स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए।
कुशवाहा ने साथ ही कहा कि चुनाव आयोग के सदस्यों के बीच मतभेद होना अपने आप में असामान्य नहीं है, लेकिन SIR को लेकर पैदा हुए सार्वजनिक भ्रम को दूर किया जाना जरूरी है।
आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ TDP भी चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगने वाले NDA सहयोगी दलों में शामिल है। TDP संसदीय दल के नेता लावु श्रीकृष्ण देवरायालु ने कहा कि आंध्र प्रदेश में SIR की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से हुई और मतदाताओं को अपनी चिंताएं उठाने के लिए पर्याप्त समय और अवसर दिया गया।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग लोकतंत्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने वाली संवैधानिक संस्था है। ऐसे में जब भी सवाल उठते हैं, उचित स्पष्टीकरण और पारदर्शिता संस्था के प्रति जनता के भरोसे को मजबूत करने में मदद करती है।
SIR को लेकर विवाद उस रिपोर्ट के बाद और बढ़ा जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कई मौकों पर ऐसे फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज की, जिन्हें उनके मुताबिक उनकी जानकारी या सहमति के बिना लिया गया था। रिपोर्ट में मतदाता पंजीकरण फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने और चुनावी डेटाबेस के केंद्रीकृत नियंत्रण से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया गया था।
इन रिपोर्टों के बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सवाल उठाए और SIR को लेकर भी आपत्तियां दर्ज कीं। हालांकि, चुनाव आयोग ने कहा है कि बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था में सदस्यों के बीच अलग-अलग राय होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और आयोग के अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
बिहार भाजपा के प्रवक्ता मनोज शर्मा ने कहा कि चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा अपनी-अपनी पार्टियों के अध्यक्ष हैं और उन्हें किसी मुद्दे पर अपनी बात रखने का अधिकार है। वहीं, भाजपा के एक अन्य पदाधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि LJP (रामविलास) और RLM के साथ भाजपा का गठबंधन बिहार तक सीमित है और इसे पूरे देश के स्तर का गठबंधन नहीं माना जाना चाहिए।
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