
उज्जैन। जिले में पूर्व बाल्यावस्था परिचर्या एवं शिक्षा (ईसीसीई) को प्रभावी बनाने के लिए शासकीय जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) में गुरुवार से तीन दिवसीय प्रशिक्षण शुरू हुआ। प्रशिक्षण में जिले के सभी विकासखंडों से आए 60 प्राथमिक शिक्षक भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण का उद्देश्य 2.5 से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए शुरू की जा रही नई कक्षाओं को गुणवत्तापूर्ण और गतिविधि आधारित शिक्षा से जोडऩा है।
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट), उज्जैन में नवीन शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पूर्व बाल्यावस्था परिचर्या एवं शिक्षा (ईसीसीई) का तीन दिवसीय प्रशिक्षण गुरुवार से प्रारंभ हुआ। संस्थान के प्रभारी प्राचार्य किशोर कुमार चंदन ने दीप प्रज्वलित कर प्रशिक्षण का शुभारंभ किया। वरिष्ठ सहायक प्राध्यापक डॉ. मनीषा टंडन ने कहा कि छोटे बच्चे ही भविष्य के समाज की मजबूत नींव हैं। प्रशिक्षण तभी सार्थक होगा, जब शिक्षक प्रारंभिक बाल्यावस्था के बच्चों के समग्र विकास पर विशेष ध्यान देंगे। उन्होंने कहा कि शासन शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है और दूर-दराज तथा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए शासकीय विद्यालय आज भी सबसे बड़ी उम्मीद हैं। प्रशिक्षण में बताया गया कि जिले के 70 शासकीय विद्यालयों में ढाई से छह वर्ष तक के बच्चों के लिए अरुण, उदय और प्रभात नाम से विशेष कक्षाएं संचालित की जाएंगी। पहले दिन राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर दिनेश पांडे ने भाषा एवं संज्ञानात्मक विकास तथा गतिविधि आधारित शिक्षण की विभिन्न विधियों की जानकारी दी। वहीं साक्षरता समन्वयक कमलेश शर्मा ने शिक्षकों को बच्चों के लिए रोचक और आकर्षक शिक्षण गतिविधियों का अभ्यास कराया। प्रभारी प्राचार्य ने प्रशिक्षण के उद्देश्य, महत्व और विद्यालयों में उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षक प्रशिक्षण से मिली सीख को कक्षा में लागू करें, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार हो सके। ईसीसीई प्रभारी डॉ. अर्चना राठौर ने योजना की रूपरेखा, रिफ्रेशर प्रशिक्षण की आवश्यकता और प्रारंभिक बाल शिक्षा के महत्व पर जानकारी दी। प्रशिक्षण के अगले दो दिनों में भी शिक्षकों को शासन के निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा देने के लिए विभिन्न विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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