
इंदौर। धार भोजशाला मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा हाई कोर्ट के आदेश का पूर्णत: क्रियान्वयन नहीं किए जाने को लेकर मुख्य याचिकाकर्ता द्वारा दो पत्र भेजे हैं। इसमें कहा गया है कि भोजशाला में दर्शनार्थियों को एक रुपए के टिकट पर प्रवेश दिया जा रहा है, जो आदेश की भावनाओं के विपरीत है।
भोजशाला प्रकरण में हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ द्वारा गत 15 मई को ऐतिहासिक फैसला दिया गया था। इस मामले में याचिकाकर्ता हिंदू फ्रंट फार जस्टिस ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग पर उक्त आरोप लगाए हैं। फ्रंट के आशीष गोयल व एडवोकेट विनय जोशी, हरिशंकर जैन, विष्णुशंकर जैन और राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री के माध्यम से पुरातत्व विभाग को भेजे पत्र में कहा गया है कि श्रद्धालु और दर्शनार्थियों को 1 रुपए के टिकट पर प्रवेश दिया जा रहा है, जो न्यायालय के आदेश की अवहेलना है। भक्तों को निशुल्क प्रवेश और पूजा का अधिकार मिलना चाहिए।
इसके अलावा भोजशाला के अंदर दक्षिण पूर्व दिशा में स्थित कमरे को खोलने की मांग की गई है, जो मूलत: मंदिर है। इसी तरह भोजशाला में 2024 में किए गए सर्वेक्षण के बाद परिसर के बाहर सौंदर्यीकरण कर कई पुराने अवशेषों, हिंदू प्रतीक चिन्ह को पेडेस्टल पर रखा गया है। मांग की गई है कि इनके दर्शन की अनुमति दी जाए। एक अन्य मांग में कहा गया है कि कोर्ट ने भोजशाला को मंदिर घोषित किया है, इसलिए यहां जबरन लगाए गए मुस्लिम धर्म के प्रतीक चिन्ह को भी वहां से हटाए जाए।
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