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आत्मघाती हमला था लाल किले के पास हुआ धमाका, NIA की चार्जशीट में बड़ा खुलासा

September 09, 2026

नई दिल्ली: दिल्ली के लाल किले (Delhi’s Red Fort) के पास 10 नवंबर 2025 को हुए धमाके की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने बड़ा खुलासा किया है. NIA की चार्जशीट के मुताबिक लाल किले के पास हुआ यह धमाका आत्मघाती बम विस्फोट था. जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपी उमर उन नबी (A-1) धमाके के वक्त कार के अंदर ही मौजूद था. चार्जशीट के अनुसार उसी ने कार में लगाए गए IED को एक खास कमांड मैकेनिज्म के जरिए एक्टिव किया था.

NIA के मुताबिक इस मामले में सामने आए आतंकी मॉड्यूल की विचारधारा और उसकी गतिविधियों की भी गहराई से जांच की गई. एजेंसी का कहना है कि इस मॉड्यूल से जुड़े आरोपी कट्टरपंथी विचारों से प्रभावित थे और हिंसक गतिविधियों की तैयारी कर रहे थे. जांच में मिले दस्तावेजों से कथित तौर पर यह भी सामने आया कि आरोपी आतंकवादी हमलों के लिए रणनीतिक और ऑपरेशनल जानकारी हासिल कर रहे थे.

‘लोन मुजाहिद पॉकेट बुक’ से ले रहे थे जानकारी
NIA की चार्जशीट में लोन मुजाहिद पॉकेट बुक ‘हत्यारा कैसे बनें’ नाम के एक दस्तावेज का भी जिक्र किया गया है. एजेंसी के अनुसार आरोपी इस किताब या मैनुअल में दी गई जानकारी का कथित तौर पर इस्तेमाल कर रहे थे. चार्जशीट के मुताबिक यह दस्तावेज AQAP यानी अल-कायदा इन द अरबियन पेनिनसुला से जुड़ा बताया गया है और इसमें विस्फोटक, हथियार, गुप्त ऑपरेशन और IED से जुड़ी जानकारी दी गई थी.


  • जांच एजेंसी के मुताबिक इस दस्तावेज में TATP जैसे विस्फोटक और रिमोट कंट्रोल के जरिए विस्फोट करने की तकनीक का विस्तृत ज्ञान बताया गया था. इसके अलावा इसमें लड़ाई, निगरानी, सुरक्षा एजेंसियों से बचने, भाग निकलने और गुप्त तरीके से काम करने जैसी तकनीकों से जुड़ी जानकारी भी मौजूद थी. NIA का दावा है कि इस तरह की सामग्री ने कथित आतंकी मॉड्यूल को हमले की तैयारी और अपनी गतिविधियों को छिपाने में मदद की.

    ‘लगातार हथियारबंद संघर्ष धार्मिक कर्तव्य’
    NIA की चार्जशीट में एक ऐसे प्रचार दस्तावेज का भी उल्लेख है, जिसमें लोकतांत्रिक व्यवस्था और मौजूदा राजनीतिक प्रणालियों के खिलाफ हिंसक संघर्ष की विचारधारा को बढ़ावा देने का आरोप है. एजेंसी के मुताबिक इस दस्तावेज में मौजूदा राजनीतिक व्यवस्थाओं को कथित तौर पर ‘शैतानी और अत्याचारी व्यवस्था’ बताया गया. इसमें ऐसी व्यवस्था को हिंसक तरीके से खत्म करने की बात कही गई थी.

    चार्जशीट के मुताबिक दस्तावेज में यह विचार भी प्रचारित किया गया कि मुस्लिम समुदाय सम्मान हासिल नहीं कर सकता, जब तक वह ‘जिहाद’ नहीं करता. यानी लगातार हथियारबंद संघर्ष को एक धार्मिक कर्तव्य के तौर पर पेश किया गया. NIA का कहना है कि इसी तरह की कट्टरपंथी विचारधारा ने कथित तौर पर उस मॉड्यूल की गतिविधियों को वैचारिक आधार दिया, जिसकी जांच लाल किला ब्लास्ट के सिलसिले में की जा रही है.

    गजवा-ए-हिंद के नाम पर हिंसा का समर्थन
    जांच एजेंसी के मुताबिक बरामद प्रचार सामग्री में हिंसा को धार्मिक रंग देने की कोशिश भी की गई थी. इसमें गजवा-ए-हिंद के नाम पर हिंसक गतिविधियों को सही ठहराने की बात सामने आई. चार्जशीट में कहा गया है कि इस दस्तावेज में इराक, अफगानिस्तान और अमेरिका में हुए विद्रोही आंदोलनों का भी उल्लेख और कथित तौर पर समर्थन किया गया था.

    NIA के मुताबिक यह सामग्री केवल वैचारिक प्रचार तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने से जुड़े व्यावहारिक निर्देश भी मौजूद थे. एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में इन दस्तावेजों को कथित आतंकी मॉड्यूल की सोच और उसकी कार्यप्रणाली को समझने में महत्वपूर्ण बताया है.

    हमले की तैयारी में छोटी-छोटी बात का ख्याल!
    चार्जशीट में बरामद दस्तावेजों के आधार पर कई तरह की कथित ऑपरेशनल रणनीतियों का भी जिक्र किया गया है. NIA के अनुसार इनमें सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए अपनी पहचान छिपाना, गुप्त तरीके से किसी जगह में दाखिल होना और अलग-अलग फर्जी पहचान का इस्तेमाल करना शामिल था. इस तरह की तकनीकों का मकसद कथित तौर पर जांच एजेंसियों की नजर से बचना था.

    इसके अलावा दस्तावेजों में घात लगाकर लक्षित हमले करने, अकेले हमलावर यानी लोन वुल्फ ऑपरेशन और फिदायीन या आत्मघाती हमलों से जुड़ी रणनीतियों का भी जिक्र बताया गया है. NIA का आरोप है कि इस तरह की सामग्री ने मॉड्यूल से जुड़े लोगों को आतंकवादी गतिविधियों के लिए मानसिक और ऑपरेशनल तौर पर तैयार करने का काम किया.

    AGuH मॉड्यूल पर NIA का फोकस
    लाल किला ब्लास्ट की जांच में NIA ने अंसार ग़ज़वत-उल-हिंद (AGuH) मॉड्यूल की भूमिका पर भी फोकस किया है. एजेंसी की चार्जशीट में इस मॉड्यूल को धमाके से जुड़े कथित नेटवर्क के तौर पर पेश किया गया है. जांच में सामने आई विचारधारा, प्रचार सामग्री और ऑपरेशनल दस्तावेजों को जोड़कर एजेंसी ने पूरे मामले की कड़ियां समझने की कोशिश की है.

    सबसे अहम खुलासा उमर उन नबी को लेकर है. NIA के मुताबिक धमाके के समय उमर नबी कार के अंदर मौजूद था और उसी ने IED को सक्रिय किया. एजेंसी के इस दावे के बाद लाल किले के पास हुए 10 नवंबर 2025 के धमाके को आत्मघाती हमला मानते हुए मामले की जांच को नया आधार मिला है. हालांकि चार्जशीट में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत की सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा.

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